हरकारा के इस ख़ास वीडियो में हम बात कर रहे हैं कि दक्षिण भारत के राज्यों को लग रहा है कि नए परिसीमन में उनके साथ “सौतेला व्यवहार” हो सकता है. इसी संदर्भ में हम रथिन रॉय के पुराने इंटरव्यू के अहम हिस्सों को दोबारा आपके सामने रख रहे हैं.
इस बातचीत में रथिन रॉय ने विस्तार से बताया था कि भारत में आर्थिक ताकत और राजनीतिक ताकत अलग-अलग दिशाओं में बंटी हुई है. दक्षिण भारत के राज्य देश की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देते हैं, लेकिन राजनीतिक प्रतिनिधित्व, यानी सीटों की ताकत, उत्तर भारत में ज्यादा केंद्रित होती जा रही है. परिसीमन के बाद यह असंतुलन और बढ़ सकता है.
वीडियो में यह भी समझाया गया है कि अगर सिर्फ आबादी के आधार पर सीटें तय की गईं, तो दक्षिण के राज्यों को नुकसान होगा, क्योंकि उन्होंने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है. वहीं, उत्तर भारत के राज्यों में ज्यादा सीटें बढ़ने की संभावना है, जिससे राजनीतिक ताकत का झुकाव और ज्यादा एक तरफ हो सकता है.
रथिन रॉय ने यह भी चेतावनी दी थी कि अगर आर्थिक और राजनीतिक ताकत का यह अंतर बहुत ज्यादा बढ़ गया, तो यह देश के संघीय ढांचे के लिए खतरा बन सकता है. दुनिया के कई उदाहरणों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि जहां ऐसा असंतुलन बढ़ता है, वहां लंबे समय में गंभीर राजनीतिक और सामाजिक तनाव पैदा होते हैं.
पूरा वीडियो देखें और समझें इस जटिल मुद्दे को आसान भाषा में.
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