हरकारा डीप डाइव के इस इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार शोभन सक्सेना ने ईरान-इज़राइल युद्ध, डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू की रणनीति, अमेरिका की वैश्विक राजनीति और भारत की विदेश नीति पर चर्चा की. बातचीत में कहा गया कि जिस युद्ध को जल्दी खत्म होने वाला बताया गया था, वह अब लंबा और अनिश्चित होता दिख रहा है.
शोभन सक्सेना ने कहा कि ईरान ने जल्दबाज़ी में झुकने के संकेत नहीं दिए हैं, जिससे अमेरिका और इज़राइल की निर्णायक सैन्य शक्ति वाली छवि कमजोर हुई है. उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के भीतर भी युद्ध को लेकर दबाव बढ़ रहा है, क्योंकि तेल की कीमतें, महंगाई और चुनावी चिंताएं ट्रंप के लिए राजनीतिक चुनौती बन रही हैं.
चर्चा में अमेरिका की “पेट्रो-डॉलर” व्यवस्था, चीन-रूस-ईरान सहयोग और वैश्विक व्यापार मार्गों पर नियंत्रण की राजनीति का भी जिक्र हुआ. कहा गया कि ऊर्जा और समुद्री रास्तों पर प्रभाव बनाए रखना इस संघर्ष का बड़ा कारण माना जा रहा है.
भारत-इज़राइल संबंधों पर बात करते हुए कहा गया कि भारत के वास्तविक आर्थिक हित खाड़ी देशों से अधिक जुड़े हैं, जहां से ऊर्जा आपूर्ति आती है और बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं. बातचीत में यह भी कहा गया कि विदेश नीति भावनाओं नहीं बल्कि राष्ट्रीय हितों के आधार पर तय होनी चाहिए.
इंटरव्यू के अंत में कहा गया कि दुनिया अब एक नए वैश्विक पुनर्संतुलन के दौर में प्रवेश कर रही है, जहां अमेरिका की पुरानी शक्ति संरचना को चुनौती मिल रही है और यह संघर्ष वैश्विक व्यवस्था को लंबे समय तक प्रभावित कर सकता है.
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