छात्र आंदोलन की माँगें मान लेने और शिक्षा मंत्री के इस्तीफ़े के बावजूद पुलिस अब लोगों के घरों तक पहुँच रही है, एफ़आईआर दर्ज करवा रही है और सोशल मीडिया पर नज़र रख रही है. वाशिंगटन डीसी से वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक अजित साही इस पूरे घटनाक्रम को हरकारा डीपडाइव पर निधीश त्यागी के साथ खोलते हैं.
इस बातचीत में: मोदी सरकार के ख़िलाफ़ बोलने वाली 25 वर्षीय युवती पर एफ़आईआर का सच, "भाषा अपराध नहीं" का तर्क, धारा 295ए और ईशनिंदा क़ानून का दुरुपयोग, पहली बार 'हिंदू' के सत्ता का दुश्मन बनने का मतलब, इक़बाल ख़त्म होने और लेम-डक सरकार की राजनीति, मीडिया के 'पांचजन्य' बन जाने पर तीखी टिप्पणी, और आर्थिक बदहाली व किसानों की आत्महत्याओं की बुनियादी नाराज़गी.
साथ ही— गुजरात के दिनों, हरेन पांड्या और जज लोया प्रकरण, और "इतिहास आपका पीछा नहीं छोड़ता" पर अजीत साही का नज़रिया. (कार्यक्रम में व्यक्त सभी दावे/आरोप अतिथि के अपने हैं.)
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