जंतर-मंतर का छात्र आंदोलन एक ऐतिहासिक और स्वतःस्फूर्त उभार था — बिना किसी राजनीतिक दल या संगठन के, जिसने महज़ एक महीने में एक केंद्रीय मंत्री को पद छोड़ने पर मजबूर कर दिया. लेकिन इस पीढ़ी की आवाज़ के साथ सरकार, पुलिस और संघ का रवैया क्या रहा?
इस Harkara DeepDive में निधीश त्यागी बात कर रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार राहुल देव से — जो जनसत्ता से लेकर टीवी पत्रकारिता तक का लंबा सफ़र तय कर चुके हैं और संघ व संसद, दोनों को क़रीब से देख चुके हैं.
बातचीत में: — जंतर-मंतर पर दो दिन: आंदोलन आख़िर था कैसा — नीट पेपर लीक से आत्महत्याओं तक — सरकार की ख़ामोशी — पैलेट गन और बिहार में एके-47 — अपनी ही पीढ़ी का दमन — टीजी मोहनदास, एस गुरुमूर्ति, कंगना रनौत के बयान क्या बताते हैं — संघ इस पीढ़ी से संवाद करने में अक्षम क्यों — शिक्षा व्यवस्था में भरा जा रहा ‘ज़हर’ और अगले 50 साल का डर.
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