‘हरकारा डीप डाइव’ के इस लाइव इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी ने मानवाधिकार कार्यकर्ता, लेखक और स्तंभकार आकार पटेल के साथ भारत-इजराइल संबंधों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बेंजामिन नेतन्याहू की नजदीकियों, गाजा युद्ध, फिलिस्तीन, भारत की विदेश नीति और लोकतांत्रिक मूल्यों पर लंबी बातचीत की. चर्चा की शुरुआत नेतन्याहू के उस हालिया बयान से हुई जिसमें उन्होंने दावा किया कि “भारत में लोग उन्हें बहुत प्यार करते हैं.”
निधीश त्यागी ने बातचीत में कहा कि नेतन्याहू केवल एक बार नहीं, बल्कि कई मौकों पर भारत और मोदी सरकार के साथ अपनी नजदीकियों का सार्वजनिक प्रदर्शन कर चुके हैं. उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने इजराइल यात्रा के दौरान नेतन्याहू को “भाई” कहा था और दोनों नेताओं के बीच सार्वजनिक रूप से बेहद आत्मीय तस्वीरें सामने आई थीं. इसी संदर्भ में सवाल उठाया गया कि आखिर एक ऐसे नेता के प्रति भारत सरकार की यह निकटता क्यों दिखाई देती है, जिस पर दुनिया भर में युद्ध अपराधों और गाजा में बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौतों को लेकर आरोप लग रहे हैं.
आकार पटेल ने जवाब में कहा कि दुनिया के ज्यादातर देशों के रिश्ते चार आधारों पर बनते हैं. साझा दुश्मन, व्यापारिक हित, साझा मूल्य या घरेलू राजनीति की समानता. उनके अनुसार भारत और इजराइल के रिश्तों में पहले तीन आधार मजबूत नहीं दिखते. उन्होंने कहा कि भारत का कुल व्यापारिक संबंध इजराइल के साथ बेहद सीमित है और रणनीतिक रूप से भी दोनों देशों के दुश्मन अलग-अलग हैं. उनके मुताबिक भारत एक संवैधानिक रूप से बहुलतावादी और धर्मनिरपेक्ष लोकतंत्र है, जबकि इजराइल पर कब्जे, रंगभेद जैसी नीतियों और फिलिस्तीनी इलाकों में दमन के आरोप लगते रहे हैं.
बातचीत के दौरान आकार पटेल ने कहा कि भारत और इजराइल की मौजूदा नजदीकी का सबसे बड़ा कारण “घरेलू राजनीतिक सोच की समानता” है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार इजराइल के उस मॉडल से प्रभावित दिखाई देती है जिसमें अल्पसंख्यकों के प्रति कठोर रवैया अपनाया जाता है. उनके अनुसार सोशल मीडिया पर सक्रिय दक्षिणपंथी समूह अक्सर फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजराइल की कार्रवाई का खुला समर्थन करते दिखाई देते हैं और यही कारण है कि नेतन्याहू को भारत से “वैधता” मिलती है.
आकार पटेल ने कहा कि पूरी दुनिया में नेतन्याहू की छवि विवादित हो चुकी है. उन्होंने गाजा युद्ध, लेबनान में सैन्य कार्रवाइयों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा उठाए गए सवालों का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत जैसे बड़े लोकतंत्र का खुला समर्थन इजराइल सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण बन जाता है. उनके अनुसार भारत लगातार “टू स्टेट सॉल्यूशन” की बात तो करता है, लेकिन मानवाधिकार उल्लंघनों पर स्पष्ट और कठोर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचता है.
इंटरव्यू में यह सवाल भी उठा कि क्या प्रधानमंत्री मोदी पूरे भारत की ओर से यह कह सकते हैं कि “भारतीय लोग नेतन्याहू से प्यार करते हैं.” आकार पटेल ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि भारत के करोड़ों मुसलमान, उदारवादी और मानवाधिकार समर्थक नागरिक गाजा में हो रही हिंसा को लेकर बेहद परेशान हैं. उनके अनुसार किसी भी लोकतंत्र में सरकार और जनता को एक मान लेना खतरनाक सरलीकरण है. उन्होंने कहा कि “मोदी पूरे भारत नहीं हैं, जैसे ट्रंप पूरा अमेरिका नहीं हैं.”
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