‘हरकारा डीप डाइव’ के इस विस्तृत इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग और वरिष्ठ पत्रकार निधीश त्यागी ने हाल के दिनों में अचानक चर्चा में आई तथाकथित “भारतीय कॉकरोच पार्टी” या “कॉकरोच जनता पार्टी” को लेकर गहरी राजनीतिक और सामाजिक पड़ताल की. बातचीत में सवाल उठाया गया कि सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई यह मुहिम युवाओं की असली नाराज़गी है या किसी बड़े राजनीतिक और वैचारिक प्रयोग का हिस्सा.
निधीश त्यागी ने कहा कि सरकार इस अभियान से असहज दिख रही है. सोशल मीडिया अकाउंट ब्लॉक होने, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग और अभिजीत दीपके के खिलाफ चल रहे अभियानों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह अब सिर्फ ऑनलाइन ट्रेंड नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक बहस बन चुका है.
श्रवण गर्ग ने इसकी शुरुआत भारत के मुख्य न्यायाधीश की उस टिप्पणी से जोड़ी, जिसमें युवाओं को “कॉकरोचों की तरह” बताया गया था. उनके अनुसार वही बयान इस डिजिटल आंदोलन का ट्रिगर बन सकता है. उन्होंने 1974 के जेपी आंदोलन, अरब स्प्रिंग और 2011 के अन्ना आंदोलन का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े आंदोलनों के पीछे हमेशा मजबूत संगठन और जमीन पर संघर्ष होता है.
बातचीत में अभिजीत दीपके की भूमिका, उनकी पृष्ठभूमि और अचानक लाखों फॉलोअर्स मिलने पर भी सवाल उठे. श्रवण गर्ग ने कहा कि इतनी तेज़ डिजिटल लोकप्रियता संदेह पैदा करती है. उन्होंने यह भी पूछा कि अगर यह आंदोलन बेरोजगारी और व्यवस्था विरोध की राजनीति कर रहा है, तो वह विपक्ष या राहुल गांधी जैसे नेताओं के साथ क्यों नहीं दिखता.
इंटरव्यू में यह आशंका भी जताई गई कि कहीं यह प्रयोग विपक्ष को कमजोर करने, ध्यान भटकाने या किसी बड़े राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा तो नहीं. आम आदमी पार्टी और अरविंद केजरीवाल का नाम भी चर्चा में आया, हालांकि कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला.
सोशल मीडिया के दौर में आंदोलन तेजी से खड़े हो सकते हैं, लेकिन उनकी नीयत, पारदर्शिता और वास्तविकता की गंभीर जांच जरूरी है. लोकतंत्र सिर्फ वायरल लोकप्रियता से नहीं चलता.
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