हरकारा डीप डाइव के इस ऑडियो इंटरव्यू में पत्रकार श्रवण गर्ग से पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर उभरती जटिल राजनीतिक तस्वीर पर विस्तार से चर्चा हुई. बातचीत की शुरुआत होती है भारी मतदान से, करीब 92 प्रतिशत वोटिंग जिसे लोकतंत्र की सक्रियता के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इसी के साथ मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने के आरोप भी गंभीर सवाल खड़े करते हैं.
इस पूरे चुनाव को सिर्फ एक राज्य का चुनाव नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर शक्ति परीक्षण के रूप में देखा जा रहा है, जहां नरेंद्र मोदी और ममता बनर्जी के बीच सीधा मुकाबला बन गया है. खास बात यह है कि इस पूरी लड़ाई में कांग्रेस पार्टी लगभग गायब नजर आती है, जिससे यह सवाल और गहरा होता है कि राष्ट्रीय स्तर पर मोदी का असली मुकाबला कौन कर सकता है.
एग्जिट पोल्स को लेकर भी इस चर्चा में गंभीर संदेह जताया गया. अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में बीजेपी और टीएमसी के बीच फासला बेहद कम दिखाया जा रहा है. कहीं 10 सीट, कहीं 12 सीट जो 2021 के मुकाबले काफी कम है, जब यह अंतर करीब 60 सीटों का था. ऐसे में यह सवाल उठता है कि क्या ये एग्जिट पोल्स वास्तविकता दिखा रहे हैं या सिर्फ एक “परसेप्शन गेम” का हिस्सा बन चुके हैं.
चर्चा का सबसे अहम पहलू 4 मई के बाद की स्थिति को लेकर है. अगर नतीजों में अंतर इतना कम रहता है, तो क्या बंगाल में राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता बनी रह पाएगी? बड़ी संख्या में तैनात पैरामिलिट्री फोर्सेज को लेकर भी सवाल उठाए गए जब मतदान हो चुका, तो इतनी भारी सुरक्षा बलों की मौजूदगी आखिर क्यों?
इसके साथ ही चुनाव में बढ़ते कम्युनल पोलराइजेशन और ‘बांग्ला अस्मिता’ बनाम ‘बाहरी’ की राजनीति को भी एक बड़ा फैक्टर बताया गया. यह चुनाव अब सिर्फ सत्ता परिवर्तन का सवाल नहीं, बल्कि राज्य की राजनीतिक दिशा और सामाजिक ताने-बाने को तय करने वाला मोड़ बन गया है.
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