राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने शताब्दी वर्ष में है — लेकिन जश्न कहीं दिखाई नहीं दे रहा. हरकारा डीपडाइव की इस कड़ी में वरिष्ठ पत्रकार श्रवण गर्ग से निधीश त्यागी की बातचीत उन सवालों पर, जो इस समय संघ को घेरे हुए हैं.
इस बातचीत में:
- आम नागरिक से नागरिकता के 11-12 कागज़ मांगे जाते हैं, तो 100 साल पुराने संगठन से रजिस्ट्रेशन और बैलेंस शीट क्यों नहीं?
- कर्नाटक के मंत्री प्रियांक खड़गे के सवाल और उन पर हुआ पलटवार
- राम जन्मभूमि ट्रस्ट घोटाले पर एक महीने बाद आया दत्तात्रेय होसबाले का बयान — "एंटी-हिंदू, एंटी-नेशनल कॉन्सपिरेसी" कहने के मायने क्या हैं?
- 10 से 12 जुलाई तक बेलगावी में होने वाली संघ की प्रांत प्रचारक बैठक का एजेंडा
- बीजेपी के 3 करोड़ से 14-18 करोड़ सदस्य कैसे हो गए, जबकि संघ की सदस्य संख्या 2013 से वहीं की वहीं है?
- क्या यह पूरा घटनाक्रम बीजेपी और संघ के बीच सुप्रीमेसी के संघर्ष की अभिव्यक्ति है?
श्रवण गर्ग का कहना है — संघ अपने संकट को देश का संकट, हिंदू समाज का संकट बनाना चाहता है. निष्कर्ष हम नहीं देंगे. तथ्य आपके सामने हैं — फ़ैसला आप कीजिए.
हरकारा — शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
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चैप्टर्स:
00:00 परिचय — संघ, संविधान और खड़गे के सवाल
02:00 संघ के 100 साल और संकटों की फ़ेहरिस्त
05:45 प्रियांक खड़गे: रजिस्ट्रेशन और चंदे का हिसाब
06:53 राम जन्मभूमि घोटाला — एफ़आईआर से होसबाले के बयान तक
11:00 बीजेपी बनाम संघ: सुप्रीमेसी की लड़ाई
12:06 बेलगावी बैठक: 10-12 जुलाई का एजेंडा
16:54 आंकड़ों की पड़ताल: संघ, बीजेपी और कांग्रेस की सदस्यता
21:04 दो आरएसएस — एक सत्ता में, एक बाहर
26:02 "एंटी-हिंदू कॉन्सपिरेसी" कौन करेगा?
33:08 क्या संघ को भंग कर देना चाहिए?
34:09 समापन — ज़िम्मेदारी किसकी?
अपील :
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