09/04/2026: लेबनान से वार्ता | खामेनेई के तेवर |असम में फिर भारी वोटिंग | हुमायूँ-भाजपा में डील | भारत अप्रासंगिक | रूस मालामाल | तमिलनाडु में विजय का गणित | कोटक महिंद्रा स्कैम | पिंक हथिनी
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां, विश्वजीत कुमार
एमपी का एक गांव ‘गाली-मुक्त’ पहचान के साथ सुर्खियों में; गाली बकने पर जुर्माना
एनआईए अधिकारी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या के 10 साल पुराने मामले में आखिरी दोषी भी बरी
सुप्रीम कोर्ट: यदि मंदिरों ने संप्रदायों के आधार पर प्रवेश रोका, तो हिंदुत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा
असम में चुनावी हिंसा में 30 घायल; पुडुचेरी में सबसे अधिक 87%, असम में 85.51% और केरल में 77.45 प्रतिशत मतदान
गुलाबी पेंट और पीड़ा: जयपुर में बंधक हथिनी ‘चंचल’ की मौत ने खड़ी कीं कई चिंताएं
ईरान युद्ध की 10 बातें; मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती अप्रासंगिकता
तृणमूल ने ‘वीडियो’ साझा किया; बंगाल में ‘हुमायूँ-भाजपा’ में 1000 करोड़ की डील का दावा
ईरान युद्ध से रूस के मुख्य तेल राजस्व में भारी उछाल, अप्रैल में $9 बिलियन तक पहुँचा
विजय का गणित: कैसे ‘टीवीके’ तमिलनाडु की दो ध्रुवीय राजनीति को उलट सकती है
150 करोड़ का कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला: वाइस-प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह पुलिस हिरासत में
दिल्ली में बिना सुरक्षा उपकरण के नाला साफ करते हुए दलित सफाईकर्मी की मौत
श्रीनगर: सेना द्वारा हिरासत में लिया गया शख्स 28 साल बाद मृत घोषित
केरल: पलक्कड़ में बीजेपी उम्मीदवार पर ‘कैश-फॉर-वोट’ के आरोप, चुनाव आयोग जांच में जुटा
लेबनान के साथ युद्धविराम वार्ता करेगा इजरायल; ईरान के आसपास “अमेरिकी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी” तैनात रहेंगे
‘अल जज़ीरा’ के अनुसार, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का कहना है कि उन्होंने लेबनान के साथ “जितनी जल्दी हो सके” सीधी बातचीत शुरू करने का निर्देश जारी किया है. उन्होंने दावा किया कि इसके लिए बेरूत (लेबनान) की ओर से अनुरोध प्राप्त हुए थे.
लेबनान ने बुधवार को एक ही दिन में हुए इजरायली हमलों की लहर में कम से कम 200 लोगों के मारे जाने और 1,000 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद राष्ट्रीय शोक की घोषणा की है.
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का कहना है कि लेबनान पर इजरायली हमले युद्धविराम समझौते का उल्लंघन हैं और ये बातचीत को अर्थहीन बना देंगे. उन्होंने आगे कहा कि ईरान लेबनानी जनता का साथ नहीं छोड़ेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक युद्धविराम के “वास्तविक समझौते” का “पूरी तरह से पालन” नहीं किया जाता, तब तक ईरान के आसपास “सभी अमेरिकी जहाज, विमान और सैन्य कर्मी” तैनात रहेंगे. उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसा न होने पर संघर्ष और बढ़ सकता है.
सुप्रीम लीडर खामेनेई: होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को ‘नए चरण’ में ले जाएगा ईरान
“द गार्डियन” के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई, जो अभी तक सार्वजनिक रूप से देखे या सुने नहीं गए हैं, उनके नाम से जारी एक बयान अभी राज्य मीडिया पर पढ़ा गया है—अस्थिर युद्धविराम की घोषणा के बाद से यह उनका पहला बयान है.
उन्होंने कहा कि ईरान उनके पिता (जिनकी युद्ध के पहले दिन हत्या कर दी गई थी) और युद्ध में मारे गए सभी लोगों का “प्रतिशोध” लेने के लिए दृढ़ संकल्पित है: “हम निश्चित रूप से हुए एक-एक नुकसान का मुआवजा, और शहीदों के खून की कीमत तथा इस युद्ध में घायलों के लिए मुआवजे की मांग करेंगे.”
उनके हवाले से यह भी कहा गया कि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन को एक नए चरण में ले जाएगा, लेकिन उन्होंने इसका विस्तार से विवरण नहीं दिया कि वह क्या होगा?
खामेनेई ने शासन-समर्थक प्रदर्शनकारियों से सड़कों पर उतरने का भी आह्वान किया क्योंकि “सार्वजनिक चौराहों पर उठने वाली आपकी आवाजों का बातचीत के परिणामों पर प्रभाव पड़ता है.”
उन्होंने आगे कहा: “ईरान युद्ध नहीं चाहता है, लेकिन वह अपने अधिकारों का त्याग नहीं करेगा और सभी प्रतिरोध मोर्चों को एक एकीकृत इकाई मानता है.”
ईरान युद्ध की 10 बातें; मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती अप्रासंगिकता
‘द वायर’ ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल युद्ध से स्पष्ट होने वाली 10 बातें प्रकाशित की हैं और हाल ही में घोषित युद्धविराम के बाद के वैश्विक और क्षेत्रीय परिणामों का विश्लेषण किया है. विश्लेषण के अनुसार, यह युद्ध ‘इस्लामिक रिपब्लिक’ (ईरान की सरकार) को सत्ता से बेदखल करने में विफल रहा और इसके बजाय इसने तेहरान को ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ पर अपने नियंत्रण के माध्यम से वैश्विक मंदी लाने का पूर्ण अधिकार दे दिया. जहाँ एक ओर बीजिंग (चीन) और इस्लामाबाद (पाकिस्तान) नए शांतिदूत के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहे हैं, वहीं मोदी का भारत खुद को किनारे पर और उभरती वैश्विक वास्तविकता में तेजी से अप्रासंगिक पा रहा है. संक्षेप में 10 बिंदु इस प्रकार हैं:
1. अमेरिकी शक्ति की सीमाओं का उजागर होना: युद्ध ने दिखाया कि अमेरिका की सैन्य शक्ति अजेय नहीं है. ईरान के खिलाफ एक उच्च-तीव्रता वाले युद्ध ने अमेरिकी शस्त्रागार की सीमाओं को उजागर कर दिया है.
2. हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण: ईरान ने सिद्ध कर दिया कि वह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण इस मार्ग को बंद कर सकता है. इसके कारण वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया और दुनिया को मंदी के मुहाने पर खड़ा कर दिया.
3. इजरायली सुरक्षा की नाजुकता: युद्ध ने दिखाया कि इजरायल की सुरक्षा व्यवस्था (जैसे आयरन डोम) भी पूरी तरह अभेद्य नहीं है और ईरान के मिसाइल हमलों ने इसकी सीमाओं को स्पष्ट कर दिया.
4. ईरान में कट्टरपंथियों की पकड़ मजबूत: युद्ध के कारण ईरान के भीतर शासन नहीं बदला, बल्कि ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (आईआरजीसी) की सत्ता पर पकड़ और मजबूत हो गई. कट्टरपंथियों ने इस युद्ध का इस्तेमाल सरकार से उदारवादी तत्वों को हटाने के लिए किया.
5. अमेरिकी सहयोगियों का असुरक्षित होना: ईरान के मिसाइलों ने सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे अमेरिकी सहयोगियों के ऊर्जा केंद्रों को निशाना बनाया. इससे इन देशों को अहसास हुआ कि अमेरिकी सुरक्षा की गारंटी उन्हें सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त नहीं है.
6. ईरान का परमाणु कार्यक्रम अब और गुप्त: सैन्य हमलों ने इमारतों को तो नष्ट कर दिया, लेकिन ईरान के वैज्ञानिक ज्ञान को नहीं. अब ईरान ने अंतरराष्ट्रीय निरीक्षण बंद कर दिए हैं, जिससे उसका परमाणु कार्यक्रम और अधिक ‘छाया’ में चला गया है जिसे रोकना अब और कठिन होगा.
7. समानांतर वित्तीय प्रणाली का उदय: प्रतिबंधों और युद्ध के जवाब में ईरान, रूस और चीन ने मिलकर एक ऐसी वित्तीय प्रणाली विकसित की है जो अमेरिकी डॉलर की पहुंच से बाहर है, जिससे ‘पेट्रोडॉलर’ के प्रभुत्व को चुनौती मिली है.
8. इजरायल का राजनीतिक प्रभाव कम होना: भले ही इजरायल ने सैन्य मोर्चे पर कुछ बढ़त बनाई हो, लेकिन अमेरिका के भीतर उसके राजनीतिक प्रभाव और समर्थन में कमी आई है.
9. ग्लोबल साउथ और नए शांतिदूत: जहाँ अमेरिका और इजरायल अलग-थलग पड़ते दिखे, वहीं चीन और पाकिस्तान जैसे देश नए ‘शांतिदूत’ के रूप में उभरते दिखे.
10. भारत की ‘अप्रासंगिकता’: प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत इस बड़े वैश्विक संकट में किनारे पर रहा और उसकी भूमिका अप्रासंगिक दिखी.
कुलमिलाकर, इस युद्ध ने दुनिया को सुरक्षित बनाने के बजाय और अधिक अस्थिर कर दिया है और वैश्विक शक्ति संतुलन को पश्चिम से पूर्व की ओर खिसका दिया है.
ईरान युद्ध से रूस के मुख्य तेल राजस्व में भारी उछाल, अप्रैल में $9 बिलियन तक पहुँचा
रॉयटर्स द्वारा गुरुवार को किए गए गणनाओं के अनुसार, अमेरिका और इजरायल के ईरान पर हमले से उपजे तेल और गैस संकट के कारण, अप्रैल में रूस के सबसे बड़े एकल तेल कर से होने वाली आय दोगुनी होकर 9 बिलियन डॉलर हो जाएगी.
‘रॉयटर्स’ की यह गणना रूस के लिए ईरान युद्ध से होने वाले भारी मुनाफे का पहला ठोस सबूत है. तेल व्यापारियों का कहना है कि इस युद्ध ने हाल के इतिहास का सबसे गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है. फरवरी के अंत में ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हवाई हमलों के बाद, ईरान ने प्रभावी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है—जो वैश्विक तेल और एलएनजी प्रवाह के लगभग पांचवें हिस्से का मार्ग है. इसके कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें $100 प्रति बैरल के काफी ऊपर निकल गईं.
रूस के विशाल तेल और गैस उद्योग से होने वाला मुख्य राजस्व उत्पादन पर आधारित है. कच्चे तेल पर निर्यात शुल्क को 2024 की शुरुआत से ‘टैक्स पैंतरेबाज़ी’ नामक एक दीर्घकालिक सुधार के तहत समाप्त कर दिया गया है. प्रारंभिक उत्पादन डेटा और तेल की कीमतों पर आधारित रॉयटर्स की गणना के अनुसार, तेल उत्पादन पर रूस का खनिज निष्कर्षण कर अप्रैल में बढ़कर लगभग 700 बिलियन रूबल (9 बिलियन डॉलर) हो जाएगा, जो मार्च में 327 बिलियन रूबल था. यह राजस्व पिछले साल अप्रैल की तुलना में लगभग 10% अधिक है. पूरे वर्ष 2026 के लिए, रूस ने खनिज निष्कर्षण कर से 7.9 ट्रिलियन रूबल प्राप्त करने का बजट रखा है.
अर्थव्यवस्था मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, कराधान के लिए उपयोग किए जाने वाले रूस के यूराल क्रूड की औसत कीमत मार्च में उछलकर $77 प्रति बैरल हो गई, जो अक्टूबर 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है. यह फरवरी के $44.59 प्रति बैरल से 73% अधिक थी और इस साल के राज्य बजट में अनुमानित $59 के स्तर से भी ऊपर थी. क्रेमलिन ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच, जो तेल और गैस बाजारों की नींव हिला रहा है, विभिन्न स्थानों से रूसी ऊर्जा के लिए भारी संख्या में अनुरोध मिल रहे हैं.
अंततः, रूस को होने वाले इस मुनाफे का आकार इस बात पर निर्भर करेगा कि ईरान संकट कितने समय तक चलता है.
असम में चुनावी हिंसा में 30 घायल; पुडुचेरी में सबसे अधिक 87%, असम में 85.51% और केरल में 77.45 प्रतिशत मतदान
असम में गुरुवार को हुई चुनावी हिंसा में लगभग 30 लोग घायल हो गए और सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है. इस बीच आज केंद्र शासित राज्य पुडुचेरी में सबसे अधिक लगभग 87 प्रतिशत; असम में 85.51 प्रतिशत और केरल में 77.45 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
‘टीएनआईई’ के अनुसार, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आरोप लगाया कि श्रीभूमि जिले के पत्थरकांडी से चुनाव लड़ रहे कार्तिक सेना सिन्हा ने रांगामाटी पोलिंग बूथ में प्रवेश किया और पीठासीन अधिकारी के साथ बहस की. सिन्हा ने दावा किया कि फर्जी मतदाताओं ने असली मतदाताओं के नाम पर वोट डाले हैं. जब पीठासीन अधिकारी ने इस आरोप से इनकार किया, तो उन्होंने ईवीएम तोड़ दी. इसके बाद कांग्रेस और भाजपा समर्थकों के बीच झड़प हो गई.”
सिन्हा का सीधा मुकाबला भाजपा उम्मीदवार और असम के मंत्री कृष्णेंदु पॉल से है. अधिकारी ने आगे बताया, “इस झड़प में लगभग 25 लोग घायल हुए हैं, जिनमें से दो की हालत गंभीर है. उन्हें इलाज के लिए करीमगंज सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है.” हिंसा के कारण इस मतदान केंद्र पर करीब तीन घंटे तक मतदान रुका रहा और चुनाव अधिकारियों द्वारा क्षतिग्रस्त ईवीएम को बदलने के बाद ही मतदान फिर से शुरू हो सका. इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है. आगे की जांच जारी है.
एक अन्य घटना में, डिब्रूगढ़ जिले के खोवांग निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा समर्थकों के साथ झड़प में असम जातीय परिषद (एजेपी) के तीन नेता घायल हो गए. एजेपी ने आरोप लगाया था कि भाजपा इलाके के एक घर में आईटी सेल चला रही थी. डिब्रूगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव अभिजीत दिलीप ने कहा, “वह इमारत किसी पार्टी का कार्यालय प्रतीत होती है और वहां वास्तव में क्या चल रहा था, इसका पता लगाने के लिए जांच की जा रही है. अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.”
तृणमूल ने ‘वीडियो’ साझा किया; बंगाल में ‘हुमायूँ-भाजपा’ में 1000 करोड़ की डील का दावा
तृणमूल कांग्रेस ने गुरुवार को एक वीडियो साझा किया, जिसमें आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूँ कबीर जैसा दिखने वाला एक व्यक्ति चुनाव के बाद समर्थन के बदले, बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा से 1,000 करोड़ रुपये की मांग कर रहा है.
19 मिनट की इस बातचीत के दौरान, कबीर जैसा दिखने वाला व्यक्ति कैमरे के पीछे मौजूद एक शख्स (जो दिखाई नहीं दे रहा है) से यह कहते हुए सुनाई दे रहा है: “भाजपा को लगभग 100 से 110 या 120 सीटें मिल सकती हैं. भाजपा को 148 सीटें नहीं मिलेंगी. शुभेंदु अधिकारी के साथ जब भी मेरी चर्चा हुई, मैंने उनसे यही कहा और वे मुझसे सहमत थे. मुझे बताया गया है कि अगर मैं 70-80 सीटें दिलवा सका, तो मुझे उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा.”
कबीर जैसे दिखने वाले इस व्यक्ति ने बातचीत में कम से कम दो भाजपा मुख्यमंत्रियों (असम के हिमंता बिस्वा सरमा और मध्य प्रदेश के मोहन यादव), निवर्तमान बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी और प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) के एक अज्ञात व्यक्ति का नाम भी लिया. ‘द रियलिटी ऑफ एचके’ नाम का यह वीडियो बुधवार को एक यूट्यूब चैनल पर प्रकाशित किया गया था. वीडियो में एक अज्ञात व्यक्ति को यह कहते सुना जा सकता है कि (मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने के) उद्देश्य को पूरा करने के लिए बंगाल के मुस्लिम निर्वाचकों को “गुमराह” करने की आवश्यकता है.
हुमायूँ कबीर जैसा दिखने वाला व्यक्ति यह कहते हुए सुनाई दे रहा है: “मैंने उनसे कहा, मैंने शुभेंदु से भी कहा कि मुझे पैसों की ज़रूरत है. मुस्लिम मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए मुझे करीब 3-4 करोड़ रुपये खर्च करने होंगे. तृणमूल (उम्मीदवारों को) ज्यादा पैसा नहीं देती है. मैं जिन उम्मीदवारों को मैदान में उतारूँगा, वे शिक्षित होंगे. मुस्लिम उम्मीदवारों को आगे लाना महत्वपूर्ण है. लेकिन मुझे पैसों की जरूरत है.”
कबीर जैसा दिखने वाला व्यक्ति 1,000 करोड़ रुपये की मांग करता सुनाई दे रहा है, जिसमें से 300 करोड़ रुपये चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच खर्च करने के लिए अग्रिम (एडवांस) के रूप में मांगे गए हैं, जैसा कि उनके अनुसार “बिहार में किया गया था.”
कबीर जैसा दिखने वाला व्यक्ति कहता सुना जा सकता है: “आप मुझे एक हज़ार करोड़ देंगे तो आपको पूरा फायदा होगा. मेरी सीटें 70-80 होंगी. आपकी सीटें 100-120 तक जाएंगी. तो ममता बनर्जी 100 के नीचे आएंगी. फिर मैं साफ-साफ चुनाव के बाद लोगों को समझाऊँगा कि केंद्र में भाजपा है. तीन टर्म जो ममता बनर्जी थीं, मुसलमानों के लिए कोई विकास नहीं हुआ... इन सभी मुसलमानों को मुझ पर पूरा भरोसा है.”
तृणमूल कांग्रेस ने इस वीडियो की गहन जांच की मांग की है, जिसकी सत्यता की पुष्टि ‘द टेलीग्राफ ऑनलाइन’ द्वारा नहीं की गई है. हुमायूँ कबीर को किए गए फोन का कोई जवाब नहीं मिला. प्रदेश भाजपा नेताओं ने भी वीडियो में किए गए दावों और तृणमूल के आरोपों पर अभी तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है.
तृणमूल प्रवक्ता और बेलियाघाटा से उम्मीदवार कुणाल घोष ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियों को वीडियो में नामजद सभी लोगों की जांच करनी चाहिए. घोष ने पूछा: “पीएमओ का वह अधिकारी कौन है जो इन संदिग्ध सौदों में शामिल है? इस व्यक्ति से तुरंत पूछताछ की जानी चाहिए. नामजद अन्य नेताओं की क्या भूमिका रही है? इस व्यक्ति को अपने प्रचार के लिए हेलीकॉप्टर किराए पर लेने के लिए फंड कहाँ से मिल रहा है?”
कबीर की पार्टी ने असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम के साथ गठबंधन किया है और बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 100 से अधिक पर उम्मीदवार उतारे हैं.
विजय का गणित: कैसे ‘टीवीके’ तमिलनाडु की दो ध्रुवीय राजनीति को उलट सकती है
एक ऐसे राज्य में जहाँ दशकों से चुनाव काफी हद तक द्विध्रुवीय (दो प्रमुख पक्षों के बीच) रहे हैं, विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) के प्रवेश ने तमिलनाडु के आगामी विधानसभा चुनावों को बहुध्रुवीय बना दिया है.
युवाओं के बीच पार्टी की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए, कुछ अनुमानों के अनुसार, टीवीके 10-20% के बीच वोट हासिल कर सकती है, भले ही वह अपने पहले चुनाव में विजेता या उपविजेता के रूप में न उभर पाए. तमिलनाडु में, जहाँ चुनावी राजनीति अक्सर बहुत कम अंतर (मार्जिन) का खेल रही है, इतना वोट शेयर यदि हकीकत में बदलता है, तो यह राज्य के राजनीतिक परिदृश्य को काफी हद तक बदल सकता है.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में दीप्तिमान तिवारी का चुनावी विश्लेषण बताता है कि अभिनेता विजय की नई पार्टी की सबसे बड़ी ताकत राज्य की युवा आबादी है. उनकी फैन फॉलोइंग और युवाओं के बीच उनकी अपील अन्य स्थापित पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है.
भले ही टीवीके अपने पहले चुनाव में बहुमत हासिल न कर पाए, लेकिन वह अन्य बड़ी पार्टियों का खेल बिगाड़ सकती है या गठबंधन की स्थिति में ‘किंगमेकर’ की भूमिका निभा सकती है. पार्टी ने खुद को द्रविड़ विचारधारा और तमिल राष्ट्रवाद के मिश्रण के रूप में पेश करने की कोशिश की है, जो डीएमके और एआईडीएमके दोनों के असंतुष्ट वोटरों को अपनी ओर खींच सकती है. सार यह है कि विजय की पार्टी केवल एक ‘वोट-कटवा’ पार्टी नहीं, बल्कि एक गंभीर राजनीतिक विकल्प के रूप में उभर रही है, जो तमिलनाडु के पुराने राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह से बदल सकती है.
केरल: पलक्कड़ में बीजेपी उम्मीदवार पर ‘कैश-फॉर-वोट’ के आरोप, चुनाव आयोग जांच में जुटा
स्क्रोल की रिपोर्ट के अनुसार, केरल के पलक्कड़ में बीजेपी उम्मीदवार शोभा सुरेंद्रन पर लगे “कैश-फॉर-वोट” के आरोपों ने चुनाव से ठीक पहले सियासी तापमान बढ़ा दिया है. चुनाव आयोग ने मामले की जांच शुरू कर दी है, जबकि सभी पक्ष अपने-अपने दावे और आरोप लेकर मैदान में हैं.
यह पूरा विवाद एक वायरल वीडियो से शुरू हुआ, जिसमें एक बुजुर्ग महिला को कुछ दिए जाने और बाद में उसकी मुट्ठी में 500 रुपये के नोट दिखाए जाने का दावा किया गया. आरोप है कि यह पैसा सुरेंद्रन के चुनावी कैंपेन से जुड़े व्यक्ति ने दिया. हालांकि महिला ने पैसे लेने से इनकार किया, लेकिन उसने यह माना कि उसने दवाइयों के लिए 5,000 रुपये मांगे थे.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी रतन यू केलकर ने कहा कि घटना की जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन हरकत में आया और फ्लाइंग स्क्वाड ने मौके पर जाकर महिला का बयान दर्ज किया. जिला कलेक्टर एमएस माधविकुट्टी ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच की सिफारिश की है. अब जांच यह तय करेगी कि क्या आदर्श आचार संहिता या जन प्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन हुआ है.
वहीं, शोभा सुरेंद्रन ने आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उन्होंने कहा. मुझे नियम पता है. “प्रतिद्वंद्वियों को समझ में आ गया है कि मैं चुनाव जीतने जा रही हूं. यह बीजेपी के खिलाफ पहले से रची गई साजिश है. पुलिस इस साजिश की जांच करे.”
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने इस मामले को चुनावी भ्रष्टाचार बताते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने आरोप लगाया कि “बीजेपी उम्मीदवार चुनाव से ठीक पहले पैसे बांटते हुए रंगे हाथ पकड़ा गया.”
एमपी का एक गांव ‘गाली-मुक्त’ पहचान के साथ सुर्खियों में; गाली बकने पर जुर्माना
मध्यप्रदेश का एक गुमनाम गांव ‘गाली-मुक्त’ बस्ती के रूप में अपनी अनूठी पहचान बनाने के लिए चर्चा में आ गया है. बुरहानपुर जिले के बोरसर गांव ने अपने निवासियों द्वारा की जाने वाली अनौपचारिक बातचीत में भी गालियों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया है. इस ‘व्यवहार संहिता’ का उल्लंघन करने वाले को या तो 500 रुपये का जुर्माना भरना पड़ता है या फिर एक घंटे तक गांव की सड़कों की सफाई के लिए मुफ्त श्रम करना पड़ता है.
‘डेक्कन क्रॉनिकल’ के अनुसार, इस पहल के सूत्रधार अश्विन पाटिल ने गुरुवार को कहा, “इस कदम ने न केवल समाज को सुधारने में मदद की है, बल्कि गांव में सामाजिक सद्भाव को भी बढ़ावा दिया है.” उन्होंने गांव के सरपंच अंतर सिंह और उप-सरपंच विनोद शिंदे के साथ मिलकर बोरसर को सार्वजनिक रूप से अपशब्दों से मुक्त करने के लिए ‘संस्कार क्रांति’ अभियान का नेतृत्व किया.
पाटिल ने बताया कि गांव को अपशब्दों से मुक्त करने का विचार तब आया जब उन्होंने देखा कि ग्रामीणों के बीच मामूली असहमति भी गाली-गलौज के कारण अक्सर बड़े विवाद में बदल जाती थी. ‘व्यवहार संहिता’ का उल्लंघन तो नहीं हो रहा, इस पर नज़र रखने के लिए निगरानी समितियाँ भी बनाई गई हैं.
एनआईए अधिकारी तंजील अहमद और उनकी पत्नी की हत्या के 10साल पुराने मामले में आखिरी दोषी भी बरी
2016 का यह मामला न्याय प्रणाली की जटिलताओं को उजागर करता है. दस साल पहले उत्तरप्रदेश के बिजनौर जिले के सहसपुर में पड़ोसी के तौर पर रहने वाले दो करीबी परिवारों के रिश्ते तब टूट गए, जब एक परिवार के दो सदस्यों की घात लगाकर हत्या कर दी गई और दूसरे परिवार के एक सदस्य को इस मामले में आरोपी बनाया गया.
मारे गए दो लोग तंजील अहमद, जो राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) में अधिकारी थे, और उनकी पत्नी फरजाना थे. एक शादी से घर लौटते समय उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. उनके पड़ोसी, रय्यान, इस मामले के पांच आरोपियों में शामिल थे. 2022 में ट्रायल कोर्ट (निचली अदालत) ने उन्हें दोषी ठहराया था और मौत की सजा सुनाई थी.
इस घटना के दस साल बाद, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस महीने बिजनौर ट्रायल कोर्ट के आदेश को पलटते हुए रय्यान को बरी कर दिया है.
न्यायमूर्ति अश्विनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति रिजवी की खंडपीठ ने कहा कि रय्यान के खिलाफ प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्य “कमजोर” थे और अभियोजन पक्ष घटनाओं की ऐसी कड़ी जोड़ने में विफल रहा जो केवल रय्यान के अपराध की ओर इशारा करती हो.
‘द इंडियन एक्सप्रेस’ में मनीष साहू की रिपोर्ट बताती है कि कैसे तंजील अहमद और रय्यान के परिवार, जो कभी बेहद करीबी पड़ोसी थे, इस घटना के बाद कट्टर दुश्मन बन गए. रय्यान के परिवार ने हमेशा उसे बेगुनाह बताया था, जबकि तंजील के परिवार ने इंसाफ की गुहार लगाई थी.
हाई कोर्ट ने नोट किया कि रय्यान के पास से बरामदगी और मुख्य आरोपी (मुनीर, जिसकी जेल में मौत हो गई थी) के साथ उसके संबंधों के बारे में पुलिस की कहानी में कई खामियाँ थीं. अदालत ने कहा कि केवल मुनीर के साथ देखे जाने के आधार पर रय्यान को हत्या का दोषी नहीं ठहराया जा सकता.
याद हो, तंजील अहमद और उनकी पत्नी को अप्रैल 2016 में बिजनौर में एक शादी से लौटते समय बाइक सवार हमलावरों ने गोलियों से भून दिया था. पुलिस ने इसे आपसी रंजिश और “अहंकार की लड़ाई” का परिणाम बताया था. इस मामले के मुख्य आरोपी मुनीर की 2022 में सोनभद्र जेल में बीमारी के कारण मृत्यु हो गई थी। रय्यान की रिहाई के साथ ही, इस चर्चित दोहरे हत्याकांड में अब कोई भी सलाखों के पीछे नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट: यदि मंदिरों ने संप्रदायों के आधार पर प्रवेश रोका, तो हिंदुत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को टिप्पणी की कि यदि मंदिर और “मठ” एक ही धर्म के भीतर संप्रदायों और अलग-अलग वर्गों के आधार पर प्रवेश को प्रतिबंधित करते हैं, तो हिंदुत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा और समाज विभाजित हो जाएगा.
‘पीटीआई’ के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन की दलीलों का जवाब देते हुए ये मौखिक टिप्पणियाँ कीं. वैद्यनाथन ने तर्क दिया था कि संविधान का अनुच्छेद 26(बी) एक धार्मिक संप्रदाय को अपने मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है और इसे अनुच्छेद 25(2)(बी) पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए, जो राज्य को सार्वजनिक प्रकृति के सभी हिंदू धार्मिक संस्थानों को सभी के लिए खोलने का अधिकार देता है. वैद्यनाथन केरल के ऐतिहासिक सबरीमाला मंदिर के भगवान अयप्पा के भक्तों की ओर से अदालत में पेश हुए थे. यह पीठ सबरीमाला मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के खिलाफ भेदभाव और विभिन्न धर्मों द्वारा अपनाई जाने वाली धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे और सीमा से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.
150 करोड़ का कोटक महिंद्रा बैंक घोटाला: वाइस-प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र सिंह पुलिस हिरासत में
‘द ट्रिब्यून’ की रिपोर्ट के अनुसार, पंचकूला नगर निगम से जुड़े करीब 160 करोड़ रुपये के एफडी गबन मामले में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) के समक्ष कोटक महिंद्रा बैंक के वाइस प्रेसिडेंट पुष्पेंद्र ने बुधवार को आत्मसमर्पण कर दिया.आरोप है कि पुष्पेंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर नगर निगम पंचकूला की लगभग 160 करोड़ रुपये की एफडी को फर्जी बैंक खातों में ट्रांसफर करवा दिया. इसके बाद इस रकम को अलग-अलग बिल्डरों और अन्य लोगों को ऊंचे ब्याज पर उधार दिया गया.
बताया जा रहा है कि वह 3 से 5 प्रतिशत तक ब्याज वसूलता था. जांच एजेंसियों का दावा है कि गबन की रकम का बड़ा हिस्सा लग्ज़री जीवनशैली पर खर्च किया गया. जांच के मुताबिक, घोटाले से मिले 30-35 करोड़ रुपये में से “एक रैंगलर रुबिकॉन, एक मर्सिडीज जीएलएस और एक हार्ले-डेविडसन मोटरसाइकिल खरीदी गई.” एजेंसी अब इन संपत्तियों को बरामद करने की कोशिश में है, जिनका लोकेशन दिल्ली बताया जा रहा है. इसके अलावा, हिमाचल प्रदेश के नारकंडा में रखे गए इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, प्रिंटर और फर्जी एफडी तैयार करने में इस्तेमाल मुहरों की भी तलाश जारी है.
एफआईआर के अनुसार, नगर निगम पंचकूला के 16 फिक्स्ड डिपॉजिट, जिनकी कुल राशि 145.03 करोड़ रुपये थी, इस घोटाले का आधार बने. आरोप है कि पूर्व सीनियर अकाउंट्स ऑफिसर विकास कौशिक ने पुष्पेंद्र सिंह के साथ मिलकर फर्जी खाते खोले और असली खातों से पैसे ट्रांसफर कर दिए.
सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस पूरे ऑपरेशन में आधिकारिक मुहरों और वरिष्ठ अधिकारियों के हस्ताक्षरों तक को कथित रूप से फर्जी बनाया गया. जांच एजेंसी का कहना है कि यह एक जटिल और बहु-स्तरीय धोखाधड़ी है, और इसमें अन्य सह-आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है.
दिल्ली में बिना सुरक्षा उपकरण के नाला साफ करते हुए दलित सफाईकर्मी की मौत
मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के दिलशाद गार्डन के ताहिरपुर में 30 मार्च को 32 वर्षीय राहुल की मौत 8 से 10 फीट गहरे नाले की मैनुअल सफाई करते समय हो गई. आरोप है कि वह बिना किसी सुरक्षा उपकरण, निगरानी या मशीनरी सहायता के काम कर रहे थे. वाल्मीकि समुदाय से आने वाले राहुल एक कॉन्ट्रैक्ट सफाईकर्मी थे, जो उस सुबह अपनी दो महीने की बकाया मजदूरी लेने गए थे. लेकिन उन्हें मजदूरी नहीं, एक जहरीले नाले में उतरने का आदेश मिला.
सुबह 8 बजे शुरू हुआ काम दोपहर 2 बजे राहुल की सांसों के साथ खत्म हो गया. बिना किसी सुरक्षा उपकरण, बिना निगरानी और बिना मशीन के वह नाले में उतरे. जहरीली गैसों, मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड, ने उन्हें वहीं मार दिया. दो घंटे बाद उनका शव बाहर निकाला गया, और परिवार को सूचना शाम 5 बजे किसी अजनबी ने दी. न विभाग आया, न ठेकेदार. पुलिस ने शुरुआत में गंभीर धाराएं तक नहीं लगाईं, जैसे यह मौत भी एक ‘रूटीन’ हो.
राहुल के भाई विजय ने कहा, “जब लोग नाले साफ करते हैं, तो वे आमतौर पर केवल अंडरवियर पहनते हैं, लेकिन राहुल पूरे कपड़ों में मिला और वे साफ थे. उसे मजदूरी के लिए मौत में धकेला गया. हमें शक है कि ठेकेदार ने सबूत हटाने की कोशिश की.”
राहुल छह भाई-बहनों में सबसे छोटे थे और प्रतिदिन 300 से 400 रुपये कमाते थे, बेहद अस्थिर रोजगार स्थिति में. उनके परिवार ने मुआवजे के आश्वासन मिलने तक अंतिम संस्कार टाल दिया. अंतिम संस्कार 1 अप्रैल को किया गया, लेकिन रिपोर्ट लिखे जाने तक पूरा मुआवजा नहीं मिला था.
श्रीनगर: सेना द्वारा हिरासत में लिया गया शख्स 28 साल बाद मृत घोषित
मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, श्रीनगर की एक अदालत ने 1997 में सेना की हिरासत में लिए जाने के लगभग 28 साल बाद अब्दुल राशिद वानी को मृत घोषित कर दिया है. यह कहते हुए कि जांच में पाया गया कि वह हिरासत में मारा गया था.
सब-जज मस्सरात जबीन ने यह आदेश वानी की पत्नी और बेटों द्वारा दायर दीवानी मुकदमे पर सुनाया. अदालत ने श्रीनगर नगर निगम को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने का निर्देश भी दिया. इस फैसले की नींव उस न्यायिक जांच पर टिकी है, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया कि वानी को जुलाई 1997 में गोरखा राइफल्स द्वारा हिरासत में लिया गया था और कथित रूप से एक सेना अधिकारी, मेजर वी. पी. यादव के हाथों मारा गया था.
जांच रिपोर्ट के अनुसार, वानी को एक अन्य व्यक्ति, फारूक अहमद भट, के साथ हिरासत में लिया गया था और बाद में हिरासत में ही मारा गया, तथा उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया. अदालत ने कहा कि न्यायिक जांच और पुलिस जांच दोनों ही वानी का पता लगाने में विफल रहीं, और जांचकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि उसको मार दिया गया था. वानी के बारे में सात साल से अधिक समय तक कोई जानकारी न होने और जांच के निष्कर्षों का हवाला देते हुए, अदालत ने कहा कि इस मामले में कानूनी रूप से मृत्यु की धारणा लागू होती है और परिवार के पक्ष में फैसला सुनाया.
कश्मीर में गुमशुदगी कोई अकेली घटना नहीं है. मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक, 1989 के बाद से हजारों लोग लापता हुए हैं. इन मामलों ने “अर्ध -विधवाओं” की एक पूरी पीढ़ी को जन्म दिया है. ऐसी महिलाएं जो न पूरी तरह विवाहित हैं, न विधवा.
गुलाबी पेंट और पीड़ा: जयपुर में बंधक हथिनी ‘चंचल’ की मौत ने खड़ी कीं कई चिंताएं
‘द वायर’ के लिए आथिरा पेरिंचेरी की रिपोर्ट है कि जयपुर में पर्यटकों की सवारी के लिए इस्तेमाल होने वाली हथिनी ‘चंचल’ की हाल ही में हुई मृत्यु ने राजस्थान में हाथियों के रख-रखाव और उनके साथ होने वाले व्यवहार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रिपोर्ट में बताया गया है कि जयपुर (विशेषकर आमेर किले) में हाथियों को आकर्षक दिखाने के लिए उनके शरीर पर रासायनिक रंगों (पेंट) का उपयोग किया जाता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ये रंग हाथियों की त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं और उनकी सेहत को नुकसान पहुँचाते हैं.
चंचल की मृत्यु के बाद यह बात सामने आई कि वह लंबे समय से स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थी. पशु अधिकार कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बीमार होने के बावजूद इन हाथियों से काम लिया जाता है और उन्हें उचित चिकित्सा सहायता नहीं मिलती.
पेरिंचेरी ने अपनी इस रिपोर्ट में उन कठिन परिस्थितियों का वर्णन किया है, जिनमें ये हाथी रहते हैं. कंक्रीट के फर्श पर लंबे समय तक खड़े रहने और लगातार पर्यटकों को ढोने के कारण उन्हें पैरों की बीमारियाँ और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ता है.
वन्यजीव विशेषज्ञों और कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि हाथियों के व्यावसायिक उपयोग पर कड़े नियम लागू होने चाहिए. चंचल की मौत को एक “निवारक मृत्यु” (जिसे टाला जा सकता था) के रूप में देखा जा रहा है, जो प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाती है.
यह रिपोर्ट इस बहस को भी उठाती है कि क्या पर्यटन के नाम पर हाथियों का इस तरह शोषण उचित है? कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं पहले ही हाथियों की सवारी को बंद करने की अपील कर चुकी हैं. बहरहाल, आथिरा की इस लंबी रिपोर्ट ने जयपुर में “एलिफेंट जॉयराइड्स” (हाथियों की सवारी) के पीछे की क्रूरता और उनके संरक्षण में हो रही कमियां को उजागर किया है.
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