07/04/2026: ईरान जंग का निर्णायक मोड़ | भारत के लिए क्या होगी कीमत? | सांसदों का महाभियोग प्रस्ताव क्यों खारिज? | बंगाल में मताधिकार से वंचित 20 लाख! | पाकिस्तान का कर्ज
‘हरकारा’ यानी हिंदी भाषियों के लिए क्यूरेटेड न्यूजलेटर. ज़रूरी ख़बरें और विश्लेषण. शोर कम, रोशनी ज़्यादा.
निधीश त्यागी, साथ में राजेश चतुर्वेदी, गौरव नौड़ियाल, फ़लक अफ़शां, विश्वजीत कुमार
आज की सुर्खियां
महायुद्ध का खतरा: ट्रंप ने ईरान की “पूरी सभ्यता” मिटाने की धमकी दी; ख़र्ग द्वीप के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका ने शुरू की बमबारी.
इन्फ्रास्ट्रक्चर डे: राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान के बिजली ग्रिड और नेटवर्क को एक झटके में नष्ट करने की योजना.
तेहरान में भगदड़: ट्रंप की धमकी के बाद 32 लाख से ज़्यादा नागरिकों ने छोड़ा घर; सुरक्षित ठिकानों की ओर पलायन.
राजनीतिक संकट: अमेरिकी सांसदों ने ट्रंप को हटाने के लिए 25वें संशोधन की मांग उठाई; “अस्थिर” होने का लगाया आरोप.
आर्थिक बोझ: भारत में कच्चे तेल की कीमतें $122 पार; एयर इंडिया ने अंतरराष्ट्रीय टिकटों पर लगाया ₹26,000 तक का सरचार्ज.
मणिपुर में मातम: बिष्णुपुर में बम धमाके से दो बच्चों की मौत; राज्य के 5 जिलों में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद.
वोटर लिस्ट विवाद: बंगाल चुनाव से पहले 20 लाख वोटर बाहर; सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से किया इनकार.
मौसम की मार: स्काईमेट ने 2026 में “सामान्य से कम” मानसून की भविष्यवाणी की; अल नीनो बन सकता है कारण.
पवन खेड़ा पर कार्रवाई: असम पुलिस ने कांग्रेस नेता के घर ली तलाशी; इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त.
पाकिस्तान का कर्ज: इस महीने चुकाना होगा 3.5 अरब डॉलर का यूएई कर्ज; आर्थिक स्थिति बेहद नाजुक.
ट्रंप की ‘सभ्यता’ मिटाने की भयानक धमकी और ख़र्ग द्वीप पर अमेरिकी बमबारी
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि उसने मंगलवार रात 8 बजे (पूर्वी समय) की समयसीमा तक होर्मुज़ जलडमरूमध्य को पूरी तरह से नहीं खोला, तो वे एक “पूरी सभ्यता” को मिटा देंगे. ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बेहद कड़े शब्दों में लिखा कि आज रात दुनिया के लंबे और जटिल इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक होने वाली है. उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद “कुछ क्रांतिकारी और अद्भुत” हो जाए जिससे इस विनाश को टाला जा सके, लेकिन उनके शब्दों से साफ़ था कि वे हमले के लिए पूरी तरह तैयार हैं. इसी बीच, अमेरिकी सेना ने ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्र ‘ख़र्ग द्वीप’ पर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि अभी तेल रिफाइनरियों को सीधा निशाना नहीं बनाया गया है, लेकिन सैन्य डिपो और मिसाइल बंकरों पर हमले तेज़ कर दिए गए हैं. ट्रंप ने पहले ही साफ़ कर दिया है कि यदि उनकी शर्तें नहीं मानी गईं, तो ईरान का हर पुल और हर पावर प्लांट आधी रात तक मलबे में तब्दील कर दिया जाएगा. ईरान ने भी कड़ा रुख़ अपनाते हुए कहा है कि यदि नागरिक बुनियादी ढांचे को छुआ गया, तो वे पूरे क्षेत्र में अमेरिकी और उसके सहयोगियों के ऊर्जा ठिकानों को तबाह कर देंगे.
‘इन्फ्रास्ट्रक्चर डे’ का विनाशकारी प्लान और व्हाइट हाउस के भीतर की खींचतान
एक्सियोस के रिपोर्टर बराक़ राविद की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ईरान के खिलाफ “इन्फ्रास्ट्रक्चर डे” मनाने की तैयारी कर रहे हैं. इसका मतलब है ईरान के पूरे बिजली ग्रिड और परिवहन नेटवर्क को एक ही झटके में नष्ट कर देना. प्रशासन के भीतर से जुड़ी विश्वसनीय सूत्रों ने बताया कि ट्रंप इस समय “एक पागल कुत्ते” की तरह व्यवहार कर रहे हैं और वे समझौते के लिए किसी भी हद तक जाने को बेताब हैं. रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि ट्रंप के सलाहकार जैसे जे.डी. वेंस और जेरेड कुशनर अभी भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और सऊदी अरब के नेता ट्रंप को उकसा रहे हैं कि वे कोई भी ढील न दें. ट्रंप ने मज़ाकिया लहज़े में यह भी बताया कि ईरानी सुप्रीम लीडर सुरक्षा कारणों से बच्चों के ज़रिए कागज़ की पर्चियां भेजकर कूटनीतिक संदेश पहुँचा रहे हैं, जिससे बातचीत की रफ़्तार बहुत धीमी हो गई है. व्हाइट हाउस ने साफ़ चेतावनी दी है कि यदि 8 बजे तक कोई ठोस नतीजा नहीं निकला, तो ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर ऐसी मार पड़ेगी जिसकी इतिहास में मिसाल नहीं मिलेगी.
तेहरान में अफरा-तफरी: नागरिक क्या करें, कहाँ जाएँ?
ड्रॉप साइट न्यूज़के लिए तेहरान से एक अनाम संवाददाता ने रिपोर्ट दी है कि ट्रंप की सोशल मीडिया धमकियों ने तेहरान के आम नागरिकों के बीच दहशत फैला दी है. 57 वर्षीय शिक्षक नरिमान ने बताया कि उन्होंने आनन-फानन में अपना सामान पैक किया है और अपने परिवार को लेकर कैस्पियन सागर के पास उत्तरी क्षेत्रों की ओर भाग रहे हैं. नरिमान का कहना है कि उन्हें ट्रंप की “नर्क में रहने” वाली धमकी ने हिला दिया है. आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 32 लाख से ज़्यादा ईरानी अपने घरों से भाग चुके हैं. जहाँ अमीर लोग अपनी गाड़ियों में भरकर सुरक्षित ठिकानों की ओर निकल रहे हैं, वहीं ग़रीब और मध्यम वर्ग के पास कोई रास्ता नहीं है. 21 वर्षीय छात्रा परीसा ने बताया कि उसके पास न तो गाड़ी है और न ही कहीं और जाने का ठिकाना, इसलिए वह केवल डिब्बाबंद खाना जमा करके अपने कमरे में बैठी है और दुआ कर रही है कि ट्रंप की यह धमकी केवल बाज़ार को प्रभावित करने वाला एक ‘ब्लफ़’ (छलावा) साबित हो.
ट्रंप की ईरान पर पोस्ट के बाद उन्हें राष्ट्रपति पद से हटाने की मांग तेज़
एक्सियोस के रिपोर्टर एंड्रयू सोलेंडर की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के बारे में राष्ट्रपति ट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद मंगलवार को कांग्रेस के डेमोक्रेटिक सांसदों के बीच उन्हें पद से हटाने की चर्चा ज़ोरों पर है. ट्रंप ने अपनी पोस्ट में डरावनी चेतावनी देते हुए लिखा था कि “आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी”, जिसके बाद सांसदों ने राष्ट्रपति को हटाने के लिए संवैधानिक उपायों पर विचार करना शुरू कर दिया है.
यह मामला इसलिए गंभीर है क्योंकि सांसद अब खुले तौर पर महाभियोग या संविधान के 25वें संशोधन के ज़रिए ट्रंप को हटाने का सुझाव दे रहे हैं. ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में इन प्रक्रियाओं को लेकर जो हिचकिचाहट थी, वह अब खत्म होती दिख रही है. विशेष रूप से इस साल वेनेज़ुएला और अब ईरान पर किए गए हमलों ने डेमोक्रेटिक सांसदों को कड़े कदम उठाने के लिए एकजुट कर दिया है.
ईरानी-अमेरिकी मूल की सांसद यासामिन अंसारी ने सबसे पहले आवाज़ उठाते हुए कहा कि 25वां संशोधन किसी कारण से ही अस्तित्व में है और ट्रंप की कैबिनेट को इसका इस्तेमाल करना चाहिए. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिकी सैनिकों का भाग्य और वैश्विक व्यवस्था दांव पर है. वहीं, सांसद इल्हान उमर ने ट्रंप को “अस्थिर पागल” करार देते हुए उन्हें तुरंत पद से हटाने की मांग की.
मंगलवार को ट्रंप की “पूरी सभ्यता के खत्म होने” वाली पोस्ट के बाद मार्क पोकन, रशीदा तलैब, रो खन्ना और मैक्सवेल फ्रॉस्ट जैसे दर्जनों सांसदों ने भी 25वें संशोधन को लागू करने की अपील की. ज्ञात हो कि यह संशोधन उपराष्ट्रपति और कैबिनेट के बहुमत को राष्ट्रपति को अस्थायी रूप से हटाने की शक्ति देता है, यदि वह अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाने में असमर्थ हो. हालांकि, इस फैसले को बरकरार रखने के लिए कांग्रेस के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है.
अंदरूनी सूत्रों के अनुसार, आम सांसद अब महाभियोग पर मतदान कराने या कैबिनेट को पत्र लिखने जैसी संगठित कार्रवाई की योजना बना रहे हैं. हालांकि, डेमोक्रेटिक नेतृत्व, जिसमें हकीम जेफ़्रीज़ शामिल हैं, फिलहाल युद्ध शक्तियों से जुड़े मतदान पर ध्यान दे रहे हैं. दूसरी तरफ, व्हाइट हाउस के प्रवक्ता डेविस इंगले ने इन मांगों को “दयनीय” बताते हुए कहा कि डेमोक्रेट्स शुरू से ही महाभियोग की रट लगाए हुए हैं. रिपब्लिकन सांसद डॉन बेकन ने इसे ट्रंप का “बातचीत करने का अंदाज़” बताया, जबकि मार्जोरी टेलर ग्रीन जैसी पूर्व समर्थकों ने भी अब ट्रंप के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए 25वें संशोधन का समर्थन किया है. विशेषज्ञों का मानना है कि रिपब्लिकन समर्थन और ट्रंप के प्रति वफादार कैबिनेट के बिना उन्हें हटाना बेहद मुश्किल होगा.
पेंटागन पर मौतों के आंकड़े छिपाने का संगीन आरोप: ‘कैजुअल्टी कवर-अप’
‘द इंटरसेप्ट’ के रिपोर्टर निक टर्स की एक खोजी रिपोर्ट ने ट्रंप प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है. रिपोर्ट के अनुसार, मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों के नुकसान का एक बड़ा हिस्सा जनता से छिपाया जा रहा है. विश्लेषण से पता चला है कि अक्टूबर 2023 से अब तक लगभग 750 अमेरिकी सैनिक मारे गए या गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि पेंटागन बहुत ही पुराने और कम आंकड़े पेश कर रहा है. यहाँ तक कि ‘यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड’ विमानवाहक पोत पर लगी आग में झुलसे 200 नाविकों के आंकड़े भी आधिकारिक गिनती से गायब हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ईरानी मिसाइलों के लगातार हमलों के डर से अमेरिकी सैनिकों को सुरक्षित बेसों से निकालकर शहरों के होटलों और निजी दफ़्तरों में छिपाया गया है. रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह “कैजुअल्टी कवर-अप” (नुकसान को छिपाना) इसलिए किया जा रहा है ताकि अमेरिकी जनता में युद्ध के प्रति विरोध न बढ़े.
पत्रकारों को जेल भेजने की धमकी: ट्रंप का नया कूटनीतिक और कानूनी हमला
सीएनएन के एडम कैनक्रिन की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने उन पत्रकारों को सीधे जेल भेजने की धमकी दी है जिन्होंने ईरानी क्षेत्र में अमेरिकी पायलटों के रेस्क्यू ऑपरेशन की खबरें समय से पहले दी थीं. ट्रंप का आरोप है कि सूचना “लीक” होने की वजह से ईरानी सेना अलर्ट हो गई और अमेरिकी पायलटों की जान ख़तरे में पड़ गई. ट्रंप ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में चिल्लाते हुए कहा, “हम उस मीडिया हाउस के पास जाएंगे और कहेंगे कि या तो सूत्र बताओ या जेल जाओ.” यह धमकी ट्रंप प्रशासन के उस लंबे अभियान का हिस्सा है जिसमें वे लगातार न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन जैसे संस्थानों पर मुकदमे कर रहे हैं. इसके साथ ही पेंटागन ने पत्रकारों को मुख्यालय से निकालकर एक बाहरी बिल्डिंग (एनेक्स) में भेजने का आदेश दिया है, जिससे युद्ध की कवरेज करना और भी मुश्किल हो जाएगा.
ख़र्ग द्वीप का रणनीतिक महत्व और ईरान की आर्थिक जीवनरेखा पर ख़तरा
सीएनएन की एक विशेष रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के लिए ख़र्ग द्वीप उतना ही महत्वपूर्ण है जितना न्यूयॉर्क के लिए मैनहट्टन. यहाँ से ईरान का 90 प्रतिशत कच्चा तेल निर्यात होता है. ट्रंप ने दशकों पहले, 1988 के एक इंटरव्यू में भी इस द्वीप पर कब्ज़ा करने की इच्छा जताई थी. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका ने यहाँ की तेल रिफाइनरियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया, तो ईरान आर्थिक रूप से बर्बाद हो जाएगा और उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के पास पैसा खत्म हो जाएगा. इसी डर से ईरान ने यहाँ पर भारी मात्रा में विमान भेदी मिसाइलें और सैनिक तैनात किए हैं. ख़र्ग द्वीप पर लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल इस समय जमा है, जो किसी भी बड़े धमाके की सूरत में एक भयानक तबाही ला सकता है.
ईरानी दूतावासों का मज़ाकिया पलटवार: “होर्मुज़ की चाबियाँ खो गई हैं”
अल जज़ीरा की एक दिलचस्प रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के राजनयिकों ने ट्रंप की गाली-गलौज वाली भाषा का जवाब तीखे मज़ाक (ट्रोलिंग) से दिया है. जब ट्रंप ने “होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलने” की मांग की, तो ज़िम्बाब्वे में ईरानी दूतावास ने ट्वीट किया, “हमने चाबियाँ खो दी हैं.” दक्षिण अफ्रीका और बुल्गारिया के ईरानी दूतावासों ने भी इस मज़ाक को आगे बढ़ाया और ट्रंप के पुराने विवादों, जैसे जेफ़री एपस्टीन केस, का ज़िक्र करते हुए उन पर निशाना साधा. लंदन के ईरानी दूतावास ने महान सूफी संत रूमी की कविता साझा की, जिसका मतलब है कि किसी “पागल” के हाथ में हथियार देना सबसे बड़ी मूर्खता है. कूटनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान जानबूझकर ट्रंप को “मानसिक रूप से अस्थिर” दिखाने की कोशिश कर रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर ट्रंप की साख को कम किया जा सके.
ईरान युद्ध: चुनाव तो बीत जाएंगे, भारी “बिल” देश को जल्द ही चुकाना होगा
‘द वायर’ में प्रकाशित एक लंबे लेख में आनंद तेलतुंबडे ने लिखा है कि भारत उस युद्ध की कीमत चुका रहा है जिसे शुरू करने में उसका कोई मत नहीं था, संचालन में कोई भूमिका नहीं थी और जिसे समाप्त करने में उसका कोई प्रभाव नहीं था—क्योंकि उसने उस स्वतंत्रता का त्याग कर दिया जो उसे लाभ दिला सकती थी.
अंग्रेजी में लिखे इस लेख का सार कहता है कि 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर अचानक हवाई हमले किए, जिसमें सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की हत्या कर दी गई. यह हमला उस समय हुआ जब शांति वार्ता “सफलता” के करीब थी और ईरान परमाणु शर्तों पर सहमत हो गया था. वैश्विक स्तर पर इस हमले की कड़ी निंदा हुई, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी ने दुनिया को चौंका दिया. हमले से ठीक दो दिन पहले इज़राइल की यात्रा और वहां “भारत इज़राइल के साथ खड़ा है” जैसे बयानों ने भारत को तटस्थता के बजाय इज़राइली खेमे में खड़ा कर दिया.
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी मात्रा में खाड़ी क्षेत्र पर निर्भर है. होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) की नाकाबंदी ने भारतीय अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 122 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच गया है. रसोई गैस (एलपीजी) का संकट की बात करें तो भारत की 60% घरेलू खपत इसी मार्ग पर निर्भर है, जिससे गैस की भारी किल्लत, लंबी कतारें और कालाबाजारी शुरू हो गई है. कतर से होने वाली एलएनजी आपूर्ति रुकने से बिजली संयंत्र और उर्वरक कारखाने अपनी क्षमता से काफी कम पर काम कर रहे हैं.
तेलतुंबडे लिखते हैं कि मोदी सरकार पश्चिम बंगाल चुनावों (अप्रैल 2026) के कारण इस संकट को जनता की नजरों से छिपा रही है. सरकार ने ईंधन पर उत्पाद शुल्क में 10 रुपये की कटौती कर उपभोक्ताओं को अस्थायी राहत तो दी है, लेकिन इससे सरकारी खजाने को 1.55 लाख करोड़ रुपये का घाटा हो रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘वित्तीय रक्तस्राव’ लंबे समय तक नहीं चल पाएगा और चुनावों के बाद जनता पर महंगाई का भारी बोझ पड़ना तय है.
खाड़ी देशों में रहने वाले 90 लाख भारतीय प्रवासी भारत की अर्थव्यवस्था के लिए 51.4 अरब डॉलर का वार्षिक योगदान देते हैं. युद्ध के कारण 2,20,000 से अधिक भारतीयों को स्वदेश वापस लाया जा चुका है. केरल, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में ग्रामीण अर्थव्यवस्थाएं प्रेषण रुकने के कारण चरमरा रही हैं. निर्माण और तेल क्षेत्र में नौकरियां खत्म होने से बेरोजगारी का खतरा बढ़ गया है.
आर्थिक अस्थिरता के कारण भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 94.78 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर गिर गया है. शेयर बाजार लगातार गिर रहा है और विदेशी निवेशकों ने अरबों डॉलर निकाल लिए हैं. आरबीआई मुद्रा को संभालने के लिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार का तेजी से उपयोग कर रहा है, जो चिंता का विषय है.
लेख के अनुसार, भारत ने अपनी सबसे बड़ी ताकत—’गुटनिरपेक्ष मध्यस्थ’ की छवि—खो दी है. ईरान में स्कूली बच्चों की मौत पर चुप्पी और इज़राइल के प्रति झुकाव ने भारत की विश्वसनीयता कम कर दी है. इसके विपरीत, पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण ‘बैक-चैनल’ मध्यस्थ के रूप में उभर रहा है, जो भारत के लिए एक भू-राजनीतिक अपमान की तरह है.
भारत एक ऐसे युद्ध की कीमत चुका रहा है जिसे वह लड़ भी नहीं रहा है. सरकार वर्तमान में केवल ‘ऑप्टिक्स’ (दिखावे) और चुनावी गणित को प्रबंधित कर रही है. ऊर्जा सुरक्षा, प्रेषण में गिरावट और कूटनीतिक अलगाव ने भारत को एक कठिन मोड़ पर खड़ा कर दिया है. चुनाव तो बीत जाएंगे, लेकिन युद्ध और आर्थिक नीतियों के कारण पैदा हुआ भारी “बिल” देश को जल्द ही चुकाना होगा. पूरा लेख यहां पढ़ सकते हैं.
(आनंद तेलतुंबडे पेट्रोनेट इंडिया लिमिटेड के पूर्व सीईओ और आईआईटी खड़गपुर तथा जीआईएम, गोवा में प्रोफेसर रहे हैं. वे एक लेखक और नागरिक अधिकार कार्यकर्ता भी हैं.)
‘पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी’ या ‘कुछ क्रांतिकारी और अद्भुत’ होगा: ट्रंप; ईरान-हम लड़ेंगे, खाड़ी में हमले तेज करेंगे
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को चेतावनी दी कि यदि ईरान उनकी नवीनतम समयसीमा (डेडलाइन) तक एक ऐसे समझौते पर सहमत नहीं होता है, जिसमें महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) को फिर से खोलना शामिल है, तो आज रात “एक पूरी सभ्यता खत्म हो जाएगी.”
ट्रंप ने पहले भी कई समयसीमाएं बढ़ाई हैं, लेकिन उन्होंने संकेत दिया कि वाशिंगटन के समयानुसार रात 8 बजे (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे) के लिए तय की गई यह समयसीमा अंतिम है. दोनों पक्षों की बयानबाजी चरम पर पहुँच गई है, जिससे ईरानी नागरिक काफी तनाव में हैं.
ट्रंप ने अपने ‘ट्रुथ सोशल’ पोस्ट में लिखा: “आज रात एक पूरी सभ्यता मर जाएगी, जिसे कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा. मैं नहीं चाहता कि ऐसा हो, लेकिन शायद ऐसा ही होगा.”
उन्होंने आगे लिखा: “हालांकि, अब जब हमारे पास ‘पूर्ण और समग्र सत्ता परिवर्तन’ है, जहाँ अलग, अधिक बुद्धिमान और कम कट्टरपंथी दिमाग वाले लोग हावी हैं, तो शायद कुछ क्रांतिकारी और अद्भुत हो सकता है, कौन जानता है? हमें आज रात पता चल जाएगा, जो दुनिया के लंबे और जटिल इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक है. 47 साल की जबरन वसूली, भ्रष्टाचार और मौत का सिलसिला आखिरकार खत्म होगा. ईरान के महान लोगों पर ईश्वर की कृपा बनी रहे!”
यह चेतावनी तब आई जब ईरान में दो पुलों और एक रेलवे स्टेशन पर हवाई हमले हुए, और ईरानी अधिकारियों ने युवाओं से बिजली संयंत्रों की सुरक्षा के लिए मानव श्रृंखला बनाने का आग्रह किया. ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि उनके सहित 1.4 करोड़ लोगों ने लड़ने के लिए स्वेच्छा से अपना नाम दिया है.
एसोसिएटेड प्रेस ‘एपी’ की खबर है कि ईरान ने इज़राइल और सऊदी अरब पर गोलीबारी की, जिससे एक प्रमुख पुल को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा. यद्यपि ईरान अमेरिकी और इज़राइली हथियारों की आधुनिकता या हवाई क्षेत्र में उनके दबदबे का मुकाबला नहीं कर सकता, लेकिन जलडमरूमध्य पर उसकी पकड़ विश्व अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुँचा रही है. इससे ट्रंप पर देश और विदेश दोनों स्तरों पर इस गतिरोध से बाहर निकलने का रास्ता खोजने का दबाव बढ़ रहा है.
राजनयिक प्रयासों में शामिल अधिकारियों ने कहा कि बातचीत जारी है – लेकिन ईरान ने नवीनतम अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, और यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप द्वारा दी गई हमलों की धमकी को टालने के लिए समय पर कोई समझौता हो पाएगा या नहीं. वैश्विक नेताओं और विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि ट्रंप द्वारा दी गई धमकी के अनुसार विनाशकारी हमले ‘युद्ध अपराध’ की श्रेणी में आ सकते हैं.
इससे पहले, ईरानी अधिकारी अलीरेज़ा रहीमी ने एक वीडियो संदेश जारी कर “सभी युवाओं, एथलीटों, कलाकारों, छात्रों और विश्वविद्यालय के छात्रों और उनके प्रोफेसरों” से बिजली संयंत्रों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाने का आह्वान किया. ईरानियों ने अतीत में भी पश्चिम के साथ बढ़ते तनाव के समय परमाणु स्थलों के चारों ओर मानव श्रृंखला बनाई है.
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया कि 1.4 करोड़ ईरानियों ने राज्य मीडिया और टेक्स्ट मैसेज अभियानों का जवाब दिया है, जिसमें लोगों से लड़ने के लिए स्वेच्छा से आगे आने का आग्रह किया गया था – और कहा कि वह भी उनमें शामिल होंगे – जबकि अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड के एक जनरल ने माता-पिता से अपने बच्चों को चौकियों पर तैनात करने के लिए भेजने का आग्रह किया.
वहीं, गार्ड ने चेतावनी दी कि यदि ट्रंप अपनी धमकी पर अमल करते हैं, तो ईरान “अमेरिका और उसके सहयोगियों को सालों तक क्षेत्र के तेल और गैस से वंचित कर देगा” और पूरे खाड़ी क्षेत्र में अपने हमले तेज कर देगा.
‘युद्ध अपराध’ की चेतावनी
इस बीच फ्रांसीसी विदेश मंत्री जीन-नोएल बारोट भी संयम बरतने की अपील करने वाली अंतरराष्ट्रीय आवाजों में शामिल हो गए. उन्होंने कहा कि नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने वाले हमले “युद्ध के नियमों और अंतरराष्ट्रीय कानून द्वारा प्रतिबंधित हैं.” संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भी उनके प्रवक्ता के माध्यम से अमेरिका को चेतावनी दी कि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले प्रतिबंधित हैं. हालांकि, ऐसे मामलों में मुकदमा चलाना बेहद कठिन होता है, और ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा कि वह युद्ध अपराध करने को लेकर “बिल्कुल भी” चिंतित नहीं है.
एयर इंडिया: टिकटों की कीमतें बढ़ने वाली हैं, फ्यूल सरचार्ज में ₹26,000 तक की वृद्धि
अरशद खान की रिपोर्ट है कि एयर इंडिया के टिकटों की कीमतें बढ़ने वाली हैं, क्योंकि एयरलाइन ने घरेलू रूटों पर ₹899 तक और अंतरराष्ट्रीय रूटों पर $280 (लगभग ₹26,000) तक के फ्यूल सरचार्ज (ईंधन अधिभार) को संशोधित किया है ($1 = ₹93 के आधार पर). एयरलाइन का यह कदम तेल विपणन कंपनियों द्वारा पिछले सप्ताह विमानन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में किए गए बदलाव के बाद आया है.
पिछले महीने पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में उछाल आने पर एयर इंडिया ने घरेलू उड़ानों के लिए ₹400 और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर $10-$50 का सरचार्ज लगाया था. अब इसे यात्रा की दूरी के आधार पर संशोधित किया गया है, जिससे घरेलू उड़ानों (2000 किमी से अधिक) पर यह ₹899 और उत्तरी अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया की उड़ानों पर $280 तक पहुँच गया है. ब्रिटेन को छोड़कर अन्य यूरोपीय उड़ानों के लिए सरचार्ज अब $205 है.
अरशद के मुताबिक, जेट ईंधन एयरलाइनों के लिए सबसे बड़ा खर्च है, जो कुल परिचालन लागत का 35% से 40% होता है. एयरलाइन ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय एटीएफ कीमतों में ऐसी किसी राहत के अभाव में, वे अंतरराष्ट्रीय रूटों पर फ्यूल सरचार्ज में अधिक बड़े बदलाव लागू कर रहे हैं.
इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार, 27 मार्च 2026 को समाप्त सप्ताह के लिए वैश्विक औसत जेट ईंधन की कीमत बढ़कर $195.19 प्रति बैरल हो गई, जो फरवरी के अंत में $99.40 थी. यह लगभग 100% की वृद्धि है. एटीएफ की कीमतों में कच्चे तेल के साथ-साथ रिफाइनरी मार्जिन (जिसे ‘क्रैक स्प्रेड’ कहा जाता है) में भी वृद्धि हुई है, जो तीन सप्ताह के भीतर लगभग तीन गुना हो गया है.
भारत में 2026 में सामान्य से कम मानसून: स्काईमेट का पूर्वानुमान
निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट वेदर ने 2026 के लिए सामान्य से कम दक्षिण-पश्चिम मानसून की भविष्यवाणी की है. एजेंसी ने मौसमी वर्षा के दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का 94% रहने का अनुमान लगाया है, जिसमें 5% की त्रुटि की गुंजाइश शामिल है. जून से सितंबर के मानसून सीजन के लिए एलपीए 868.6 मिमी है, जिसे देखते हुए अपेक्षित वर्षा एलपीए के 90-95% के “सामान्य से कम” दायरे में आती है. इस निजी पूर्वानुमानकर्ता ने इससे पहले जनवरी 2026 में भी कमजोर मानसून का संकेत दिया था और अब उसी दृष्टिकोण की पुष्टि की है.
‘डेक्कन क्रॉनिकल’ की रिपोर्ट के अनुसार, विकसित हो रही समुद्री स्थितियाँ इस वर्ष के मानसून को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं. इस कमजोर दृष्टिकोण के पीछे प्रमुख कारकों में से एक सीजन के उत्तरार्ध में अल नीनो स्थितियों का संभावित पुनरुत्थान है. रिपोर्ट में कहा गया है, “वर्ष की दूसरी छमाही में अल नीनो के मजबूत होने की उम्मीद है, जिससे वर्षा कमजोर हो सकती है और मानसून का दूसरा भाग अधिक अनियमित हो सकता है.”
मध्य और पश्चिमी भारत, विशेष रूप से वर्षा आधारित कृषि क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान जैसे उत्तरी राज्यों में भी बारिश की कमी देखी जा सकती है, खासकर अगस्त और सितंबर के दौरान. इसके विपरीत, पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों की स्थिति बेहतर रहने की संभावना है, जहाँ देश के बाकी हिस्सों की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर वर्षा हो सकती है.
ज्ञानेश के “दुर्व्यवहार साबित करने के लिए ज़रूरी सबूतों की कमी” बता सांसदों का प्रस्ताव खारिज
राज्यसभा के सभापति और उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग का प्रस्ताव लाने के विपक्ष के नोटिस को खारिज कर दिया है. वायर द्वारा देखी गई 17 पन्नों की आदेश प्रति के अनुसार, सभापति ने कहा कि 63 सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित इस नोटिस में “दुर्व्यवहार साबित करने के लिए ज़रूरी सबूतों की कमी” है. आदेश में कहा गया कि विपक्ष द्वारा लगाए गए आरोप ‘राजनीतिक बहस’ के लिए तो प्रासंगिक हो सकते हैं, लेकिन वे किसी संवैधानिक पद के अधिकारी को हटाने की कार्यवाही के लिए आवश्यक “उच्च संवैधानिक मानक” पर खरे नहीं उतरते.
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार पर ‘दुर्व्यवहार’ के सात आरोप लगाए थे, जिनमें उनकी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाना और उन पर कार्यपालिका के प्रति वफादार होने के इल्ज़ाम शामिल थे. सभापति राधाकृष्णन ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पद से हटाने की कार्यवाही “अस्पष्ट और व्यक्तिपरक आशंकाओं या कथित राजनीतिक परिणामों” के आधार पर शुरू नहीं की जा सकती. उन्होंने तर्क दिया कि ज्ञानेश कुमार की पिछली सरकारी सेवा को उनके पक्षपाती होने का आधार नहीं माना जा सकता, क्योंकि 1950 के दशक से अब तक के अधिकांश मुख्य चुनाव आयुक्तों ने नियुक्ति से पहले सरकार में वरिष्ठ पदों पर कार्य किया है.
विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार की उस प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी ज़िक्र किया था जिसमें उन्होंने विपक्ष के एक नेता से माफी की मांग की थी. सभापति ने इसे “राय का अंतर” बताते हुए कहा कि यह दुर्व्यवहार की श्रेणी में नहीं आता. इसके अलावा, बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और आधार को पहचान के रूप में इस्तेमाल करने जैसे आरोपों पर सभापति ने कहा कि ये मामले फिलहाल उच्चतम न्यायालय में विचाराधीन हैं, इसलिए उन पर अभी कोई प्रतिकूल निष्कर्ष निकालना न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप होगा. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि महाभियोग जैसी असाधारण शक्ति का उपयोग केवल बहुत ही दुर्लभ और ठोस परिस्थितियों में किया जाना चाहिए, न कि प्रशासनिक मतभेदों या राजनीतिक धारणाओं के आधार पर.
मणिपुर फिर सुलग उठा: बम हमले में 2 बच्चों की मौत, विरोध में हिंसा, इंटरनेट बंद, सुरक्षा बल तैनात
मणिपुर फिर सुलग उठा है. मकतूब मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बिष्णुपुर जिले में मंगलवार देर रात हुए बम हमले में दो छोटे बच्चों की मौत हो गई, जबकि उनकी मां गंभीर रूप से घायल हो गई.
यह घटना रात करीब 1 बजे मोइरांग के ट्रोंग्लाओबी अवांग लेइकाई इलाके में हुई, जो पहाड़ और घाटी के संवेदनशील सीमा क्षेत्र में स्थित है. बताया गया कि संदिग्ध उग्रवादियों द्वारा दागा गया बम एक घर पर गिरा, जिसमें एक 5 साल का लड़का और छह महीने की बच्ची की मौत हो गई. हमले के समय तीनों, दोनों बच्चे और उनकी मां, घर के कमरे में सो रहे थे.
हमले का आरोप इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम पर लगाया गया है, हालाँकि उन्होंने इन आरोपों को खारिज कर दिया है. संगठन ने कहा कि बिना जांच के किसी समुदाय को जिम्मेदार ठहराना गलत है और इससे तनाव बढ़ता है.
‘द टेलीग्राफ वेब डेस्क’ के अनुसार, बम हमले के विरोध में भड़के प्रदर्शनों के बीच, राज्य सरकार ने पांच जिलों (इम्फाल पश्चिम, इम्फाल पूर्व, थोबल, काकचिंग और बिष्णुपुर) में तीन दिनों के लिए इंटरनेट और मोबाइल डेटा सेवाओं को निलंबित करने का आदेश दिया है.
स्थानीय लोगों ने आज सुबह विरोध प्रदर्शन किया और इलाके में एक पेट्रोल पंप के पास दो तेल टैंकरों और एक ट्रक को आग के हवाले कर दिया. इस हत्या के विरोध में मोइरांग पुलिस स्टेशन के सामने और पूरे इम्फाल में टायर जलाए गए. प्रदर्शन के दौरान पुलिस की एक अस्थायी चौकी को भी नष्ट कर दिया गया. प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि मंगलवार को ट्रोंगलाओबी के पास के इलाके से एक विस्फोटक उपकरण भी बरामद किया गया है. मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने इस घटना की जांच एनआईए को सौंपने का निर्णय लिया है. इधर, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर कहा कि तीन साल की हिंसा के बाद भी मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं.
उल्लेखनीय है कि मोइरांग ट्रोंगलाओबी का निचला इलाका चुराचांदपुर के पहाड़ी क्षेत्रों के करीब स्थित है. यहाँ 2023 और 2024 में मैतेई और कुकी-ज़ो समूहों के बीच जातीय संघर्ष के दौरान लगातार गोलीबारी देखी गई है. मई 2023 से मैतेई और कुकी-ज़ो समूहों के बीच जारी जातीय हिंसा में अब तक 260 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और हजारों लोग बेघर हो गए हैं.
पवन खेड़ा के दिल्ली निवास पर असम पुलिस की तलाशी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त
असम पुलिस की एक टीम मंगलवार (7 अप्रैल, 2026) को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा के दिल्ली स्थित आवास पर पूछताछ के लिए पहुँची. यह कार्रवाई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और उनके परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़े एक मामले के सिलसिले में की गई है. हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस टीम ने दिल्ली पहुँचने पर औपचारिक रूप से स्थानीय पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की एक टीम भी इस कार्यवाही में शामिल हुई.
कांग्रेस नेता के घर के बाहर संवाददाताओं से बात करते हुए असम पुलिस के डीसीपी देबोजीत नाथ ने बताया कि पवन खेड़ा अपने आवास पर मौजूद नहीं थे. हालाँकि, उन्होंने बताया कि घर की तलाशी ली गई और कुछ इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ज़ब्त किए गए हैं. डीसीपी के अनुसार, तलाशी में कुछ “आपत्तिजनक सामग्री” भी मिली है, लेकिन इस स्तर पर उसका विवरण साझा नहीं किया जा सकता. यह मामला गुवाहाटी के क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में दर्ज है. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने सोमवार (6 अप्रैल, 2026) को कांग्रेस पार्टी पर उनके और उनकी पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा के खिलाफ “विदेशी ताकतों से प्रेरित दुष्प्रचार अभियान” चलाने का आरोप लगाया था. उन्होंने दावा किया कि पवन खेड़ा द्वारा उनकी पत्नी पर लगाए गए गंभीर आरोपों के तार पाकिस्तान से जुड़े हैं.
मुख्यमंत्री सरमा के अनुसार, उनकी पत्नी ने पवन खेड़ा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है. खेड़ा ने दावा किया था कि सरमा की पत्नी के पास तीन देशों के पासपोर्ट हैं, दुबई में लग्जरी संपत्ति है और अमेरिका के व्योमिंग में लाखों का निवेश है. सरमा ने एएनआई को बताया कि दिल्ली में पुलिस तलाशी के बाद खेड़ा हैदराबाद “भाग गए” हैं. दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस कार्रवाई की कड़ी निंदा की है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इसे “विच हंट” करार देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश कर रहे हैं. रमेश ने कहा कि पुलिस का भारी बल तैनात करना यह साबित करता है कि मुख्यमंत्री डरे हुए हैं और अपनी हार को सामने देख बौखला गए हैं.
बिहार की स्थिति पर बड़ा सवाल, आंकड़ों में सच्चाई या राजनीति का नैरेटिव?
‘हरकारा’ डीप डाइव की हालिया चर्चा में बिहार की मौजूदा स्थिति को लेकर एक गंभीर और विस्तृत बातचीत की. इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार समी अहमद के साथ उस मुद्दे को केंद्र में रखा, जिसने हाल ही में राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है, तेजस्वी यादव का वह ट्वीट, जिसमें बिहार को देश के लगभग हर नकारात्मक सूचकांक में सबसे पीछे बताया गया है.
चर्चा की शुरुआत इसी सवाल से हुई कि क्या ये दावे महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी हैं या इनके पीछे वास्तविक आंकड़े मौजूद हैं. बातचीत के दौरान यह बात सामने आई कि इन दावों का एक बड़ा हिस्सा आंकड़ों पर आधारित है और उन्हें पूरी तरह खारिज करना आसान नहीं है. साक्षरता दर, प्रति व्यक्ति आय, बेरोजगारी, स्वास्थ्य व्यवस्था, शिक्षा की गुणवत्ता और अपराध जैसे कई क्षेत्रों में बिहार की स्थिति चिंताजनक बताई गई.
हालांकि, इस बहस का सबसे अहम पहलू यह रहा कि अगर स्थिति इतनी गंभीर है, तो ये मुद्दे चुनावी राजनीति में केंद्र में क्यों नहीं आते. समी अहमद ने इस पर स्पष्ट कहा कि विपक्ष इन मुद्दों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने में असफल रहा है. सोशल मीडिया पर बयान देना या ट्वीट करना एक हद तक चर्चा जरूर पैदा करता है, लेकिन जब तक इन मुद्दों को जमीनी स्तर पर आंदोलन का रूप नहीं दिया जाता, तब तक उनका राजनीतिक असर सीमित ही रहता है.
बातचीत में बिहार की जमीनी हकीकत पर भी विस्तार से चर्चा हुई. अपराध की घटनाओं का जिक्र करते हुए बताया गया कि घटनाएं कम नहीं हुई हैं, बल्कि उनकी रिपोर्टिंग पहले की तुलना में कम दिखाई देती है. मीडिया की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए, जहां सरकारी दबाव और विज्ञापन पर निर्भरता के कारण खबरों की प्राथमिकता प्रभावित होती है.
अंत में यह उठता है कि क्या सिर्फ राजनीतिक नेतृत्व को दोष देना पर्याप्त है, या फिर समाज और जनता की भी इसमें भूमिका है. चर्चा में यह बात सामने आई कि जब तक जनता सवाल नहीं पूछेगी और जवाबदेही तय नहीं करेगी, तब तक किसी भी राज्य में वास्तविक बदलाव मुश्किल है.
बंगाल चुनाव से पहले 20 लाख वोटर बाहर, सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी से नहीं डाल पाएंगे वोट
पश्चिम बंगाल में 23 और 29 अप्रैल 2026 को होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले लाखों मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित हो गए हैं. आर्टिकल 14 के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को लगभग 20 लाख लोगों को वोट देने से रोकने की अनुमति दे दी है. यह बीस लाख लोग उन 60 लाख मतदाताओं में शामिल थे, जिन्हें एसआईआर के दौरान अंडर एडजुडिकेशन में रखा गया था, लेकिन जांच के बाद इनमे से 20 लाख लोगों को अयोग्य घोषित कर दिया गया है.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की उस मांग को ख़ारिज कर दिया है, जिस मे कहा गया था कि वोटर लिस्ट फ्रीज करने से पहले कुछ और समय दिया जाए ताकि अपील की प्रक्रिया पूरी हो सके. राज्य सरकार की ओर से वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने कहा था कि अपील प्रक्रिया भी इसी जांच का हिस्सा है और अगर नाम हटा कर लिस्ट जारी कर दी गई तो लोग बिना अपील के ही वोट देने से वंचित हो जाएंगे.
कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल अपने तरीके से काम करेंगे और अंतिम फैसला देने में एक या दो महीने लग सकते हैं, इसलिए उन पर जल्दबाजी का दबाव नहीं डाला जा सकता. इस फैसले के साथ ही एक ऐसी प्रक्रिया का अंत हुआ, जिस पर पहले से ही पारदर्शिता की कमी और जल्दबाजी के आरोप लग रहे थे. 20 फरवरी के बाद 1, 2 और 3 अप्रैल को तेजी से जांच की गई, जिसमें बड़ी संख्या में नाम हटाए गए.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि “अंडर एडजुडिकेशन” वाले वोटरों की सूची समय पर सार्वजनिक नहीं की गई, जिससे लोग समय पर अपील नहीं कर सके. उन्होंने 2025 की वोटर लिस्ट के आधार पर चुनाव कराने की मांग की थी.
इस प्रक्रिया में मुस्लिम समुदाय के मतदाता ज्यादा प्रभावित हुए हैं. कई इलाकों में बड़ी संख्या में मुस्लिम वोटरों को “अंडर एडजुडिकेशन” में रखा गया. उदाहरण के तौर पर, भवानिपुर में 51.8% और बालीगंज में 76.1% ऐसे वोटर मुस्लिम थे, जबकि इन क्षेत्रों में उनकी कुल आबादी इससे कम है.
अब जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे 15 दिनों के भीतर अपील कर सकते हैं. इसके लिए 21 मार्च को 19 ट्रिब्यूनल बनाए गए, जिन्हें हाई कोर्ट के पूर्व जजों की अध्यक्षता में चलाया जाना है. हालांकि 2 अप्रैल तक ये ट्रिब्यूनल पूरी तरह शुरू नहीं हो पाए थे. राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल ने भी कहा था कि वे नहीं बता सकते कि ये कब पूरी तरह काम शुरू करेंगे.
इस बीच, दक्षिण 24 परगना के 43 वर्षीय शिक्षक एम.डी. फिरोज उद्दीन अहमद, जो 2001 से वोट डाल रहे हैं, का नाम सिर्फ इसलिए संदिग्ध माना गया क्योंकि 2002 की वोटर लिस्ट में उनके नाम में “एम डी” नहीं था, जबकि बाकी सभी दस्तावेजों में उनका नाम सही है. इसी तरह, उत्तर 24 परगना के सेवानिवृत्त सूबेदार मेजर आज़ाद अली, जो कारगिल युद्ध, ऑपरेशन पराक्रम (2001-02) और ऑपरेशन सिंदूर (2025) में हिस्सा ले चुके हैं, उनका नाम भी “अंडर एडजुडिकेशन” में रखा गया है और उन्हें भी ट्रिब्यूनल में अपील करनी होगी, जो इस चुनाव से पहले पूरी नहीं हो पाएगी. चुनाव आयोग ने चुनाव घोषित होने के बाद पश्चिम बंगाल में 483 प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का तबादला किया, जो अन्य तीन राज्यों की तुलना में 21 गुना अधिक है.
बंगाल में एसआईआर के दौरान करीब 91 लाख वोटर हटाए, मुर्शिदाबाद में सबसे ज्यादा असर
द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान क़रीब 91 लाख वोटरों के नाम हटा दिए गए हैं. चुनाव आयोग के अनुसार 28 फरवरी को जारी अंतिम सूची में 60.06 लाख वोटरों को “अंडर एडजुडिकेशन” रखा गया था, जिनमें से 27,16, 393 लोगों को अयोग्य पाया गया है.
इससे पहले दिसंबर में जारी ड्राफ्ट सूची से 58.25 लाख वोटरों को मृत, अनुपस्थित, स्थानांतरित या डुप्लीकेट बता कर हटा दिया गया था. इसके बाद 28 फरवरी को अंतिम सूची में भी क़रीब 5 लाख और नाम हटाए गए थे. इस तरह कुल मिलाकर लगभग 91 लाख वोटर सूची से बाहर हो गए और कुल मतदाता संख्या 7.66 करोड़ से घट कर 7.04 करोड़ रह गई है.
सबसे ज़्यादा नाम मुस्लिम बहुल ज़िले मुर्शिदाबाद में हटाए गए, जहाँ 11,01,145 में से 4,55,137 वोटरों की अयोग्य घोषित किया गया है. इसके अलावा कोलकाता नार्थ में 39,164 और कोलकाता साउथ में 28,468 वोटरों के नाम हटाए गए हैं. वहीं चुनाव आयोग का कहना है कि यह प्रक्रिया चरणबद्ध और पारदर्शी तरीके से की गई है और अंतिम आंकड़ों में कुछ मामूली बदलाव संभव है.
7 साल बाद सुप्रीम कोर्ट में महिला जननांग विकृति पर सुनवाई
द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक़, क़रीब 7 साल की देरी के बाद सुप्रीम कोर्ट भारत में महिला जननांग विकृति (फीमेल जेनिटेलिया म्यूटिलेशन) के ख़िलाफ़ दायर याचिका पर सुनवाई करने जा रहा है. 7 अप्रैल से नौ जजों की संविधान पीठ इस मामले की सुनवाई शुरू करेगी. यह अर्ज़ी 2017 में वकील सुनीता तिवारी ने दाख़िल की थी, जिसमें दाऊदी बोहरा समुदाय में प्रचलित इस रिवायत को असंवैधानिक घोषित करने, इसके ख़िलाफ़ क़ानून बनाने और मौजूदा क़ानूनों के तहत कार्यवाई की मांग की गई है.
इस मामले के साथ सुप्रीम कोर्ट अन्य धार्मिक मामलों को भी सुनने वाली है, जैसे सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश, मस्जिदों में महिलाओं के अधिकार और पारसी महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश. इन सभी मामलों में तय किया जाएगा कि धार्मिक स्वतंत्रता की सीमा क्या है और कोर्ट इसमें कितना हस्तक्षेप कर सकता है.
इस मामले ने पहली बार सुप्रीम कोर्ट को एफजीएम जैसे मुद्दे पर विचार करने का मौक़ दिया है. 2018 में सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि यह प्रथा बच्चों के शरीर और निजता के अधिकार का उल्लंघन हो सकती है और इसका कोई वैज्ञानिक अधिकार नहीं है, साथ ही इससे दर्द और मानसिक आघात होता है. इन सबके बावजूद भारत में अब तक एफएमजी को रोकने के लिए कोई अलग क़ानून नहीं है. अभी आईपीसी और पॉक्सो के तहत कार्रवाई हो सकती है. 2017 की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि दाऊदी बोहरा समुदाय की लगभग 75% लड़कियों ने यह प्रक्रिया झेली है और 97% ने इसे दर्दनाक क़रार दिया है.
दूसरी तरफ, दाऊदी बोहरा समुदाय की एक संस्था ने इस याचिका का विरोध किया और इसे धार्मिक स्वतंत्रता में दखल बताया. उनका कहना है कि यह उनकी धार्मिक प्रथा है और इसे एफएमजी के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. कोर्ट यह भी देखेगा कि क्या किसी धर्म से बाहर का व्यक्ति उसकी प्रथाओं को चुनौती दे सकता है, और धार्मिक अधिकारों और महिलाओं के मौलिक अधिकारों, जैसे समानता, गरिमा और शरीर पर अधिकार, के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
पाकिस्तान इस माह यूएई का 3.5 अरब डॉलर का कर्ज चुकाएगा, आईएमएफ लक्ष्यों के उल्लंघन का खतरा
दो सरकारी अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि पाकिस्तान इस महीने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) को 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाएगा. ‘रॉयटर्स’ के अनुसार, इससे देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ गया है और जून तक 1.3 अरब डॉलर के यूरोबॉन्ड पुनर्भुगतान के कारण आईएमएफ कार्यक्रम के लक्ष्यों के उल्लंघन का जोखिम पैदा हो गया है.
यह पुनर्भुगतान ऐसे समय में हो रहा है जब पाकिस्तान 7 अरब डॉलर के आईएमएफ कार्यक्रम के तहत जून तक अपने विदेशी मुद्रा भंडार को 18 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने का लक्ष्य रख रहा है. इस कार्यक्रम की शर्त है कि द्विपक्षीय जमा को आगे बढ़ाया जाए.
पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक का भंडार वर्तमान में लगभग 16.4 अरब डॉलर है. यूएई का यह कर्ज कुल भंडार का लगभग 18% है. इससे उस अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है जो पहले से ही ईंधन की बढ़ती कीमतों और ईरान युद्ध से जुड़ी किल्लत के कारण महंगाई और धीमी विकास दर से जूझ रही है. एक अधिकारी के अनुसार, यह ऋण 2018 से ‘रोल ओवर’ किया जा रहा था, जिसमें लगभग 6% वार्षिक ब्याज पर 3 अरब डॉलर की सुविधा शामिल थी. पहले इसे वार्षिक आधार पर बढ़ाया जाता था, लेकिन इस साल की शुरुआत में इसे मासिक विस्तार में बदल दिया गया. अब इस्लामाबाद ने इसे पूरी तरह चुकाने का फैसला किया है.
अपील :
आज के लिए इतना ही. हमें बताइये अपनी प्रतिक्रिया, सुझाव, टिप्पणी. मिलेंगे हरकारा के अगले अंक के साथ. हरकारा सब्सटैक पर तो है ही, आप यहाँ भी पा सकते हैं ‘हरकारा’...शोर कम, रोशनी ज्यादा. व्हाट्सएप पर, लिंक्डइन पर, इंस्टा पर, फेसबुक पर, यूट्यूब पर, स्पोटीफाई पर , ट्विटर / एक्स और ब्लू स्काई पर.









